बूढ़ा किरायेदार, बस मरने से पहले

चंद्रा मनीष बूढ़ा किरायेदार, बस मरने से पहले..चला जाऊंगा .. तुम्हारा घर मंदिर हैअब यहां से कहां जाऊंगायूं नहीं कहते इसे देवभूमि ..यही एहसास बाकी मेरे अंदर एक मूरत तुम्हारी सान्तवना जैसी..इसकी पूजा छोड़कर कहां जाऊंगा…रोज जलाने होते हैं दीप.. चढ़ाने होते हैं फूल…हमदर्दी से तुम्हारी इस बुढ़ापे में..जीने की ऊर्जा बाकी है… बस मरने … Continue reading बूढ़ा किरायेदार, बस मरने से पहले