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Gallantry award: उत्तराखंड के तीन रणबांकुरों को सम्मान, मेजर दिग्विजय कीर्ति चक्र, सचिन नेगी और रविंद्र सिंह को शौर्य चक्र

Gallantry award: अदम्य साहस का परिचय देते हुए देश के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले रण बांकुरों को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गैलंट्री अवॉर्ड से सम्मानित किया। राष्ट्रपति भवन में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह 2024 में 37 बहादुर सैनिकों को वीरता पुरस्कार प्रदान किये। राष्ट्रपति ने 10 कीर्ति चक्र 27 शौर्य चक्र जिनमें मरणोपरांत 7 कीर्ति चक्र और 7 शौर्य चक्र प्रदान किये।

Gallantry award, राष्ट्रपति मुर्मू ने किया सम्मानित

उत्तराखंड के रहने वाले जांबाज कमांडो मेजर दिग्विजय सिंह को कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। जबकि ग्रेनेडियर्स 55वीं बटालियन के मेजर सचिन नेगी और आर्म्ड कोड 44वीं बटालियन के मेजर रविंद्र सिंह रावत को राष्ट्रपति ने शौर्य चक्र देकर सम्मानित किया मालूम हो कि मेजर सचिन और मेजर रविंद्र जम्मू कश्मीर में कई आतंक विरोधी अभियानों को नेस्तनाबूत कर चुके हैं उनके अदम्य साहस को देखते हुए रक्षा मंत्रालय ने वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया।

वीरता पुरस्कारों में इंस्पेक्टर दिलीप कुमार दास कांस्टेबल बबलू रखा सिपाही पवन कुमार कैप्टन अंशुमान सिंह हवलदार अब्दुल मजीद हेड कॉन्स्टेबल राजकुमार यादव कांस्टेबल शंभू राय को मरणोपरांत कीर्ति चक्र प्रदान किए गए इसके साथ ही कांस्टेबल सफीउल्लाह कादरी, मेजर विकास भांग्भू, मेजर मुस्तफा बोहरा, राइफलमैन कुलभूषण मंता, हवलदार विवेक सिंह तोमर, राइफलमैन आलोक राव और कैप्टन एम वी प्रांजल को मरणोपरांत शौर्य चक्र प्रदान किया गया।

मणिपुर में कमांडो दिग्विजय ने उग्रवादियों का किया सफाया

पौड़ी गढ़वाल के डांग गांव के रहने वाले मेजर दिग्विजय सिंह रावत को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आदम में साहस के लिए कीर्ति चक्र से सम्मानित किया 21 पैरा स्पेशल फोर्सेज के कमांडो मेजर दिग्विजय ने मणिपुर में उग्रवादियों से लोहा लेते हुए उनके मंसूबों को सफल कर दिया बीते साल 5 जनवरी 2023 को गृहमंत्री अमित शाह मणिपुर में मेडिकल कॉलेज का लोकार्पण करने पहुंचे थे इस दौरान एक ऑपरेशन में उनको सूचना मिली की घाटी के विद्रोही समूह एक वीआईपी को मणिपुर में निशाना बनाने की फिराक में है। उग्रवादियों ने सैनिकों को देखते ही ऑटोमैटिक हथियारों से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी लेकिन गोलियों की बौछार के बीच भी हार ना मानते हुए मेजर रावत ने अपनी टीम का कुशलता से नेतृत्व करते हुए जमीन पर रेंगते हुए आतंकवादियों के एक कैप्टन को मार गिराया और दूसरे को घायल कर दिया।

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