कहानी कविता
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मसूरी वाली खिड़की…तुम्हारे इंतज़ार में मायूस
Chandra Maneesh मसूरी वाली खिड़की ये जो तुम अपने देश को छोड़कर दुनिया भर में फिरती हो.. हवाई जहाज से…
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बूढ़ा किरायेदार, बस मरने से पहले
चंद्रा मनीष बूढ़ा किरायेदार, बस मरने से पहले..चला जाऊंगा .. तुम्हारा घर मंदिर हैअब यहां से कहां जाऊंगायूं नहीं कहते…
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यही तो है प्रेम वाली कविता
डॉ बीना सिंह रागी प्रेम, है निराकार नहीं कोई आकार नहीं नौलखा हारप्रेम सौगात उपहार प्रेम नहीं व्यापारना जीत ना…
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हो जाएगी सुबह…
chandra manish हो जाएगी सुबह…तुम्हारी बेरुखी रेगिस्तान की अथाह मरुभूमि है… इसी बियाबान में कुदरत ने तुम्हारे आगोश में खिलते…
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सेवानिवृत्ति के रंग
अरुणा मनवर यूँ ही नहीं सेवा निवृत्त हुए हैं आज, ऑफिस की मिट्टी में रचे-बसे हैं हम और हर साँस।देखी…
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गिरकर संभलना आता है ,उसे किसी के सहारे की जरूरत भी नहीं …
अर्चना चौहान(प्रधानाचार्या, नागौर- राजस्थान) गिरकर संभालना आता है..निगाहें उसकी सिर्फ मंजिल की तरफ ही होती है अपनों से पहले दूसरों…
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गणतंत्र दिवस पर कविता
अरुणा मनवर हम भारत के लोग..दिन 26 जनवरी 1950..दूर हुए सारे दोष… मिला संविधान – बना गणतंत्र अपना…हुआ पूरा आज़ाद…
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अब द्यूत कोई आंगन में मेरे फिर न खेला जाएगा
डाॅ कल्पना सिंह अब द्यूत कोई आंगन में मेरे फिर न खेला जाएगा चीर हरण का काला वह इतिहास नहीं…
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शुभ दीपावली
डॉ सुधीर शुक्ला दीवाली हो, दीवाल नहीं।रिश्तों का रखिए ख़्याल वहीं।। यह ज्योति पुंज करती प्रकाश।सब पर समान हो ,…
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तीलियां माचिस की
डॉ सुधीर शुक्ला तीलियां माचिस की लेकर आग ऐसी न लगाओ।हो सके तो राष्ट्र में उनसे, यहां दीपक जलाओ।। आपका…
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