उत्तराखंड में ऐतिहासिक सुरंगों का सफल ब्रेकथ्रू, कनेक्टिविटी और विकास को मिलेगी नई गति,सीएम धामी और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव रहे मौजूद

विवरण: उत्तराखंड में सिलक्यारा और जानसू सुरंगों का सफल ब्रेकथ्रू, बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी के लिए एक ऐतिहासिक दिन। जानें कैसे ये उपलब्धियां, जिनमें भारत की सबसे लंबी परिवहन सुरंग भी शामिल है, हिमालयी राज्य में विकास को बढ़ावा देंगी और यात्रा को आसान बनाएंगी। मुख्य शब्द: उत्तराखंड, सुरंग ब्रेकथ्रू, सिलक्यारा सुरंग, जानसू सुरंग, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना।
सुरंगों का सफल ब्रेकथ्रू: पौड़ी/देहरादून: उत्तराखंड के लिए आज का दिन एक ऐतिहासिक दिन के रूप में दर्ज हुआ है। आज प्रदेश में एक नहीं, बल्कि दो महत्वपूर्ण सुरंगों का सफल ब्रेकथ्रू हुआ है। सिलक्यारा और जानसू सुरंगों के निर्माण में जुटी एजेंसियों के अथक प्रयासों का आज जश्न मनाया गया। धामी सरकार भी इन दोनों सुरंगों की सफलता को राज्य के बुनियादी ढांचे के विकास में एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देख रही है। कई चुनौतियों को पार करते हुए, इन सुरंगों का पूरा होना क्षेत्र में कनेक्टिविटी के एक नए युग का प्रतीक है। दिलचस्प बात यह है कि आज ही के दिन 1853 में भारत की पहली रेल यात्रा बोरीबंदर और ठाणे के बीच हुई थी। इस महत्व को बढ़ाते हुए, भारत की सबसे लंबी परिवहन सुरंग, जानसू सुरंग का ब्रेकथ्रू भी हुआ है।
सुरंगों का सफल ब्रेकथ्रू ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना ने हासिल की महत्वपूर्ण उपलब्धि:
महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग ब्रॉड गेज रेल परियोजना के तहत आज एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल हुई। पौड़ी जिले के देवप्रयाग और जनासू को जोड़ने वाली टी-8 और टी-8एम सुरंगें सफलतापूर्वक अपने अंतिम छोर तक पहुंच गईं। इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव उपस्थित थे। मुख्यमंत्री धामी ने इस चुनौतीपूर्ण परियोजना से जुड़े सभी इंजीनियरों, तकनीकी विशेषज्ञों और श्रमिकों के समर्पण और कड़ी मेहनत की सराहना करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई दी। इस दौरान पौड़ी गढ़वाल के सांसद अनिल बलूनी और मंत्री धन सिंह रावत भी मौजूद रहे।
सुरंगों का सफल ब्रेकथ्रू जर्मन तकनीक ने दिलाई सफलता:
प्रभावशाली 14.57 किलोमीटर लंबी जानसू सुरंग की खुदाई आधुनिक टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) ‘शक्ति’ की मदद से की गई। यह भारत की सुरंग निर्माण तकनीक के इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, क्योंकि यह पहली बार है जब चुनौतीपूर्ण हिमालयी क्षेत्र में रेलवे सुरंगों के निर्माण के लिए टीबीएम तकनीक का उपयोग किया गया है। 9.11 मीटर व्यास वाली सिंगल-शील्ड रॉक टीबीएम ने उल्लेखनीय गति और सटीकता का प्रदर्शन किया है, जो वैश्विक स्तर पर एक नया मानक स्थापित करती है। क्षेत्र की जटिल भूवैज्ञानिक परिस्थितियों को देखते हुए, विशेष टीबीएम मशीनें जर्मनी से मंगवाई गई थीं। परियोजना की शेष सुरंगों का निर्माण पारंपरिक ड्रिल और ब्लास्ट विधि से किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, खुदाई और निर्माण गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने के लिए जनासू से लगभग 1.5 किलोमीटर की दूरी पर एक ऊर्ध्वाधर शाफ्ट भी बनाया गया है। यह परियोजना न केवल तीर्थयात्रियों को महत्वपूर्ण लाभ पहुंचाएगी, बल्कि उत्तराखंड के सामाजिक, आर्थिक और रणनीतिक विकास को भी महत्वपूर्ण गति प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री धामी ने दी बधाई:
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर उन सभी के अथक प्रयासों, समर्पण और कौशल की सराहना की जिन्होंने सुरंगों के ब्रेकथ्रू को संभव बनाया। उन्होंने विशेष रूप से इस चुनौतीपूर्ण कार्य में शामिल इंजीनियरों, तकनीकी विशेषज्ञों और श्रमिकों को बधाई दी।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा :
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस दिन को वास्तव में ऐतिहासिक बताया। उन्होंने भारत की सबसे लंबी परिवहन सुरंग में टीबीएम के ब्रेकथ्रू पर जोर दिया, जो ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे उन्होंने समानांतर सुरंगों वाली एक अत्यंत जटिल परियोजना बताया। उन्होंने हिमालय की चुनौतीपूर्ण भूविज्ञान में सफलतापूर्वक टनल बोरिंग मशीन के उपयोग की महत्वपूर्ण उपलब्धि पर प्रकाश डाला। मंत्री वैष्णव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करने और चुनौतीपूर्ण परियोजनाओं को क्रियान्वित करने की प्रेरणा देने का श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि हिमालय की भूविज्ञान में टीबीएम का संचालन एक महत्वपूर्ण बाधा थी, जिसे व्यापक अनुसंधान और वैश्विक विशेषज्ञों के सहयोग से दूर किया गया, जिसके परिणामस्वरूप अद्वितीय परिस्थितियों के अनुकूल टीबीएम में संशोधन किए गए। इसके कारण एक विशिष्ट “हिमालयन टनल मेथड” का विकास हुआ, जो लागू की गई सरलता का प्रमाण है। उन्होंने पुष्टि की कि यह उपलब्धि देवभूमि (उत्तराखंड) के लोगों के लिए प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिबद्धता की एक बड़ी सिद्धि है।
सिलक्यारा सुरंग का सुरक्षित ब्रेकथ्रू:
एक समानांतर उपलब्धि में, उत्तरकाशी जिले में स्थित सिलक्यारा सुरंग में भी आज सफलतापूर्वक ब्रेकथ्रू हुआ। इस अवसर पर सुरंग के पास नवनिर्मित बाबा बौखनाग मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा समारोह भी आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सिलक्यारा सुरंग का पूरा होना गंगोत्री और यमुनोत्री के बीच की दूरी को 26 किलोमीटर कम कर देगा। सिलक्यारा सुरंग के निर्माण में कई चुनौतियां आईं, जिनमें 2023 की वह दुखद घटना भी शामिल है जब कई श्रमिक अंदर फंस गए थे, जिससे यह सुरंग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गई थी। 17 दिनों की कठिन परीक्षा के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री धामी के कुशल मार्गदर्शन में 41 श्रमिकों को सफलतापूर्वक बचाया गया।
चुनौतियों पर विजय:
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भाग लिया। सिलक्यारा सुरंग का पूरा होना गंगोत्री और यमुनोत्री के तीर्थ स्थलों के बीच कनेक्टिविटी में काफी सुधार करेगा, जिससे यात्रा की दूरी 26 किलोमीटर कम हो जाएगी। सिलक्यारा सुरंग का निर्माण चुनौतियों से भरा था, खासकर 2023 की घटना जब श्रमिक 17 दिनों तक फंसे रहे, जिससे वैश्विक ध्यान आकर्षित हुआ। 41 श्रमिकों का सफल बचाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री धामी के कुशल नेतृत्व का प्रमाण था।



