Bageshwar News: जखेड़ा मसाला यूनिट ने बदली ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर, आत्मनिर्भर उत्तराखंड को मिल रही नई उड़ान

बागेश्वर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आत्मनिर्भर उत्तराखंड के विजन को धरातल पर उतारते हुए बागेश्वर जिले ने स्वरोजगार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जनपद के जखेड़ा क्षेत्र में स्थित लाहुरघाटी आजीविका स्वायत्त सहकारिता (तिलसारी) द्वारा संचालित मसाला यूनिट ग्रामीण आजीविका को नई दिशा देने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रही है।

स्थानीय मसालों का प्रसंस्करण और उच्च उत्पादन क्षमता
वर्ष 2025-26 में शुरू की गई इस मसाला यूनिट में धनिया, जीरा, हल्दी और मिर्च जैसे दैनिक उपयोग के मसालों का प्रसंस्करण किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कच्चे माल का उपयोग कर तैयार किए जा रहे इन मसालों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस यूनिट में स्थापित आधुनिक मशीन की प्रसंस्करण क्षमता लगभग 30 किलोग्राम प्रति घंटा है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की स्थापना के लिए कुल 10 लाख रुपये की वित्तीय धनराशि स्वीकृत की गई थी। इस राशि का संयोजन परियोजना सहयोग, बैंक ऋण तथा समूह की अपनी अंशपूंजी को मिलाकर किया गया है।
पहले ही वर्ष में 3.95 लाख का टर्नओवर और बंपर मुनाफा
जखेड़ा मसाला यूनिट ने अपनी स्थापना के पहले ही वित्तीय वर्ष (2025-26) में शानदार प्रदर्शन किया है। यूनिट ने 3,95,500 रुपये का कुल वार्षिक कारोबार (टर्नओवर) दर्ज किया, जिसमें 2,58,516 रुपये का शुद्ध वार्षिक लाभ शामिल है।
यूनिट की इस नियमित आय से न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं, बल्कि स्थानीय मसालों के प्रसंस्करण, सुरक्षित पैकेजिंग और प्रभावी विपणन नेटवर्क को भी बढ़ावा मिल रहा है।
रीप (REAP) परियोजना से ग्रामीण उद्यमों को मिल रहा संबल
ग्रामीण उद्यम वेगवृद्धि परियोजना (REAP) के तहत ग्रामीण परिवारों को उनकी स्थानीय क्षमताओं, पारंपरिक कौशल और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार आजीविका की गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। जखेड़ा की यह मसाला यूनिट रीप परियोजना की सफलता का एक प्रत्यक्ष उदाहरण है, जहां स्थानीय कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन (Value Addition) कर उन्हें बड़े बाजारों तक पहुंचाया जा रहा है।
बागेश्वर जनपद में रीप परियोजना के माध्यम से विभिन्न स्थानीय उद्यमों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी आय के साधन विकसित हो रहे हैं, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि हो रही है, तथा समग्र रूप से राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त हो रही है।



