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Kanpur को जानो: गज़ब है कनपुरिया अंदाज़, पूरी दुनिया में है फेमस

अनुराग यादव
(लेखक जाने माने पत्रकार हैंं)

देख भाई हम हैं कनपुरिया…कानपुर की बोलचाल की भाषा, अपने अनोखे अंदाज़ और ठेठ देसीपन के लिए मशहूर है। बोली में एक खुलापन और बेबाकी है। लोग बिना ज्यादा लाग-लपेट के सीधे और स्पष्ट बोलते हैं। हँसी-मजाक का आम माहौल इसे एक खास शहर बनाता है, जहाँ हर गली-नुक्कड़ में एक कहानी और हँसी का ठिकाना मिलता है। हल्का-फुल्का हास्य और तंज आम बात है, बात – बात में मज़ाक और ठिठोली चलती है। लेकिन यह सामने वाले के अपमान के लिए नहीं बल्कि मौज लेने के लिए खिंचाई होती है। यह खास बोली और संस्कृति ही इस शहर को रंगीन और जीवंत बनाती है।

कनपुरिया के घर पर इनकम टैक्स की रेड में ढाई सौ करोड़ कैश

एक खास बात और एक आम कनपुरिया की जेब में चवन्नी ना हो लेकिन चेहरे पर टेंशन नहीं, बातें और हौसले बुर्ज ख़लीफ़ा को खरीदने के होंगे। वहीं दूसरी ओर पुराने बजाज स्कूटर पर घूमता हुआ और सड़क किनारे ठेले पर चाय पीते हुए कनपुरिया के घर पर इनकम टैक्स की रेड में ढाई सौ करोड़ कैश और जेवर भी मिल जाते है। मतलब आम कनपुरिया की वास्तविक स्थिति का अंदाजा लगा पाना मुश्किल होता है।अब अपने मुंह से अपनी तारीफ करना तो बहुत अच्छा लगता है.. लेकिन बहुत ज्यादा तारीफ आप लोग बर्दाश्त नहीं कर पाओगे। क्योंकि मैं भी कानपुर से ही हूँ। मेरा जन्म स्थान कानपुर है और जिंदगी का काफी समय कानपुर में बीता है। हाल ही मे कानपुर के घंटाघर मेट्रो स्टेशन पर लगा यह क्रिएटिव देखकर, कानपुर की खासियत पर चर्चा करने से मैं अपने को रोक नहीं पाया। लीजिए पेश है कानपुर की बोलचाल के कुछ खास अंश/ slang:”क्या बात है!””क्या कहते हो!””बकैती” -“रंगबाजी”-“भौकाल” – रौब या दबदबा।”जुगाड़” – किसी तरह काम चला लेना”काहे” – क्यों?”आएं…” – प्रश्नवाचक शब्द…?, जिसके कई अर्थ होते हैं। जिसे बातचीत में कभी भी और कहीं भी प्रयोग किया जा सकता है।”बबाल” – कई अर्थ- झगड़ा, चर्चा में, बहुत अच्छा”चकाचक” – साफ-सुथरा या बहुत बढ़ियाअगर आप कानपुर से हैं या वहाँ गए हैं, तो आप भी कोई खास शब्द या अनुभव बता सकते हैं? #kanpur #कानपुर

*साभार*

*अनुराग यादव जी की फेसबुक वॉल से*

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