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सहकारिता से समृद्धि: CM धामी ने हल्द्वानी में ₹17 करोड़ की वित्तीय सहायता दी, उत्तराखंड को ‘आत्मनिर्भर’ बनाने का आह्वान

सहकारिता से समृद्धि: हल्द्वानी, नैनीताल : उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष-2025 के उपलक्ष्य में हल्द्वानी (जनपद नैनीताल) में आयोजित भव्य सहकारिता मेले में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सहकारिता क्षेत्र में कार्यरत स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं को बड़ी वित्तीय सहायता प्रदान की।

  • वित्तीय सहायता:
    • ₹16.97 करोड़ – मध्यकालीन दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता कल्याण योजना के तहत पशुपालन एवं सब्जी उत्पादन से जुड़ी महिलाओं को।
    • ₹75.50 लाखNRLM स्वयं सहायता समूहों को।

सहकारिता से समृद्धि ‘सहकारिता से पर्यटन विकास’ थीम पर आधारित मेला

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष और उत्तराखण्ड राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर आयोजित यह सात दिवसीय मेला राज्य की सहकारिता आधारित अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगा।

मेले की मुख्य थीम ‘सहकारिता से पर्यटन विकास’ है। इसमें सहकारी समितियों, स्वयं सहायता समूहों और किसानों के उत्पादों को मंच मिलेगा। साथ ही, होमस्टे प्रबंधन, ईको-पर्यटन, स्थानीय व्यंजन और कृषि उत्पाद संवर्धन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

सहकारिता का वैश्विक और राष्ट्रीय महत्व

मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा वर्ष 2025 को “अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष” घोषित करना, इस क्षेत्र की वैश्विक महत्ता को दर्शाता है।

  • केंद्रीय पहल: उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की, जिन्होंने देश में सहकारिता को नई दिशा देने के लिए एक अलग सहकारिता मंत्रालय का गठन किया है, जो केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में कार्य कर रहा है।

उत्तराखंड सहकारिता में देश का नेतृत्व

मुख्यमंत्री धामी ने सहकारिता को सशक्त बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए ऐतिहासिक कदमों पर प्रकाश डाला:

  • डिजिटलीकरण में पहल: उन्होंने गर्व से कहा कि प्रदेश में सहकारी समितियों के कंप्यूटरीकरण की शुरुआत पूरे देश में पहली बार उत्तराखंड से हुई। आज सभी 671 समितियाँ पूरी तरह डिजिटल प्रणाली से कार्यरत हैं।
  • सीएससी और जन औषधि केंद्र: 640 समितियाँ सीएससी (CSC) के रूप में विकसित हुई हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों में बीमा, पेंशन, आधार और डिजिटल सेवाएँ दे रही हैं। 24 समितियाँ जन औषधि केंद्रों के रूप में काम कर रही हैं।
  • राष्ट्रीय डेटाबेस: प्रदेश की 5,511 समितियों में से 3,838 समितियों का डेटा राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस पर अपलोड किया जा चुका है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता बढ़ी है।

किसानों और SHG के लिए नई योजनाएं

मुख्यमंत्री ने किसानों और स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करने की योजनाओं का विवरण दिया:

  • नई समितियों का गठन: फरवरी 2023 से अब तक 800 नई PACS, 248 नई डेयरी समितियाँ और 116 मत्स्य समितियाँ गठित की गई हैं।
  • ब्याज-मुक्त ऋण: “दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना” के तहत किसानों और स्वयं सहायता समूहों को ₹5 लाख तक का ब्याज-मुक्त ऋण (पशुपालन, मत्स्य पालन आदि के लिए) और सहकारी समितियों के माध्यम से ₹1 लाख का ब्याज-मुक्त फसली ऋण दिया जा रहा है।
  • मिलेट मिशन: किसानों को प्रोत्साहन देने के लिए मंडुआ की खरीद दर इस वर्ष ₹48.86 प्रति किलोग्राम निर्धारित की गई है।
  • जनता का भरोसा: सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में ₹16 हजार करोड़ से अधिक की जमापूंजी होना जनता के भरोसे का प्रमाण है।

लखपति दीदी और आत्मनिर्भर उत्तराखंड

महिला सशक्तिकरण पर विशेष जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की बहनें आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं और यह गर्व का विषय है कि प्रदेश की 1 लाख 68 हजार से अधिक महिलाएँ आज “लखपति दीदी” बन चुकी हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री जी के स्वदेशी उत्पादों के उपयोग के आह्वान का समर्थन करते हुए कहा कि उत्तराखंड को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जनसहभागिता सबसे महत्वपूर्ण है और प्रदेशवासियों से स्वदेशी उत्पादों के प्रयोग को जन आंदोलन बनाने का आग्रह किया।

कार्यक्रम में सांसद अजय भट्ट, विधायक दीवान सिंह बिष्ट, राम सिंह कैड़ा, सुरेश भट्ट सहित अन्य जनप्रतिनिधि, स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएँ एवं स्थानीय उत्पादक उपस्थित रहे।

PHOTO – DIPR UTTRAKHAND

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