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UP News : रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा बने राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ, 5500 से अधिक आवेदनों में से हुआ चयन

अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को अपना पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मिल गया है। भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को इस प्रतिष्ठित और महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में कमान संभाली थी।

श्रीमणिराम दास छावनी में ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण बैठक में इस नाम पर अंतिम मुहर लगाई गई। बैठक में स्वामी कमलनयन दास, अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन, ट्रस्टी महंत दीनेंद्र दास और कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि सहित अन्य वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे।

कौन हैं रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा

एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के एक बेहद अनुभवी और सम्मानित अधिकारी रहे हैं। उन्होंने वेस्टर्न एयर कमांड के चीफ के अलावा इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन्स) के डिप्टी चीफ तथा डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइजेशन और ट्रेनिंग के डिप्टी चीफ के रूप में भी सेवाएं दी हैं।

नेशनल डिफेंस एकेडमी खड़कवासला और एयर फोर्स एकेडमी डुंडीगल के पूर्व छात्र रहे जितेंद्र मिश्रा ने एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल, एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज (मोंटगोमरी, अलबामा) और रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज से उच्च शिक्षा प्राप्त की है।

6 दिसंबर 1986 को वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में शामिल होने वाले जितेंद्र मिश्रा के पास 38 वर्ष से अधिक के करियर में 3000 घंटे से ज्यादा का उड़ान अनुभव है।उन्होंने 18 से अधिक प्रकार के फाइटर, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर उड़ाए हैं।स्क्वाड्रन लीडर के पद पर रहते हुए वे उस टीम का अहम हिस्सा थे जिसने कारगिल युद्ध के शुरुआती चरण में मिराज 2000 विमान पर लेजर-गाइडेड बमों को क्रियान्वित किया था, जिनका सफल प्रयोग ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान टाइगर हिल और मुंथो ढालो में किया गया था।

एआई स्क्रीन आधारित पारदर्शी चयन प्रक्रिया

राम मंदिर के पहले सीईओ पद के लिए चयन प्रक्रिया को बेहद आधुनिक और पारदर्शी बनाया गया।कुल 5,585 आवेदनों में से उम्मीदवारों को छांटने के लिए एआई आधारित प्रणाली और 600 अंकों का एक विशेष मूल्यांकन ढांचा तैयार किया गया था।

प्रारंभिक चरण में 3,577 उम्मीदवारों की जांच की गई, जिनमें से 470 या अधिक अंक हासिल करने वालों को आगे बढ़ाया गया। इसके बाद ऑनलाइन संवाद के जरिए 108 आवेदकों का साक्षात्कार हुआ और अंतिम चरण में अयोध्या बुलाकर 16 उम्मीदवारों का व्यक्तिगत इंटरव्यू लिया गया। इसके आधार पर तीन नाम शॉर्टलिस्ट किए गए, जिनमें से ट्रस्ट ने जितेंद्र मिश्रा के नाम का चयन किया।

प्रशासनिक मजबूती की दिशा में बड़ा कदम

सीईओ की नियुक्ति का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब मंदिर के दान में हुई कथित गबन की घटना के बाद प्रशासनिक सुधारों की मांग उठ रही थी। इस मामले के प्रकाश में आने के बाद आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, जबकि ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा समेत पदाधिकारियों ने अपने पदों से त्यागपत्र दे दिया था। नए सीईओ के आगमन से मंदिर प्रशासन, वित्तीय पारदर्शिता और प्रबंधन व्यवस्था में अनुशासन आने की पूरी उम्मीद है।

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