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हंगामे के बीच मानसून सत्र संपन्न, संसद से पारित हुए 15 विधेयक

21 जुलाई से प्रारंभ हुआ संसद का मानसून सत्र 21 अगस्त को समय से एक दिन पहले ही समाप्त कर दिया गया। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों को हंगामे के बीच स्थगित कर दिया गया। इस सत्र में कुल 32 दिन में 21 बैठकें हुईं, लेकिन विपक्ष के लगातार हंगामे और नारेबाज़ी के कारण कार्यवाही बार-बार बाधित रही। विपक्ष की मुख्य मांग बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर चर्चा कराने की थी। हालांकि सरकार ने विरोध के बावजूद 15 विधेयकों को पारित कराने में सफलता पाई।

सत्र के दौरान 14 विधेयक लोकसभा में पेश किए गए, जिनमें से 12 पारित हुए। राज्यसभा ने 15 विधेयकों को मंजूरी दी और अंततः दोनों सदनों ने मिलकर 15 विधेयक पारित किए। विपक्ष के हंगामे के कारण अधिकतर विधेयक बिना व्यापक बहस के पारित हुए, जिससे संसदीय जवाबदेही को लेकर सवाल उठे।

सत्र की सबसे अहम चर्चा ऑपरेशन सिंदूर को लेकर हुई। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत की निर्णायक सैन्य कार्रवाई पर लोकसभा में लगभग 19 घंटे और राज्यसभा में 16 घंटे तक बहस हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में जवाब दिया, जबकि गृहमंत्री ने राज्यसभा में समापन वक्तव्य दिया। 130 से अधिक सांसदों ने इस चर्चा में हिस्सा लिया। इसके विपरीत, भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन यात्रा और “विकसित भारत 2047” के लिए अंतरिक्ष कार्यक्रम की भूमिका पर प्रस्तावित चर्चा विपक्ष के हंगामे के चलते अधूरी रह गई।

लगातार व्यवधान के कारण दोनों सदनों की कार्यक्षमता बेहद प्रभावित हुई। लोकसभा केवल 120 उपलब्ध घंटों में से 37 घंटे ही चली, जो लगभग 31 प्रतिशत उत्पादकता रही। राज्यसभा में 41 घंटे का कामकाज हुआ, जो 33 प्रतिशत दक्षता के बराबर है। सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित होने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला सहित कई संसदीय नेताओं ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि यह रणनीतिक अवरोध संसदीय गरिमा को आहत करता है और जनता को आवश्यक नीतिगत बहस से वंचित करता है।


मानसून सत्र 2025 में पारित हुए महत्वपूर्ण विधेयक

महत्वपूर्ण विधेयक और विधायी दिशा

हंगामे के बावजूद सरकार ने कई अहम विधेयकों को पारित कराया। इनमें सबसे प्रमुख रहा आयकर (सं. 2) विधेयक, 2025। इससे पहले सरकार ने आयकर विधेयक, 2025 को वापस ले लिया था और संशोधित स्वरूप में नया विधेयक पेश किया गया। संसद की चयन समिति की सिफारिशों को लगभग पूरी तरह शामिल करते हुए इसे 11 अगस्त को लोकसभा और 12 अगस्त को राज्यसभा ने पारित कर दिया। यह कानून सरकार के कर ढांचे को आधुनिक आर्थिक जरूरतों के अनुरूप बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

सत्र के दौरान राष्ट्रीय खेल शासन विधेयक, 2025 भी पारित हुआ। इस कानून का उद्देश्य खेलों के विकास, खिलाड़ियों के कल्याण और खेल संगठनों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

इसी प्रकार, ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन एवं विनियमन विधेयक, 2025 भी पारित हुआ। यह कानून ई-स्पोर्ट्स, शैक्षिक खेलों और सामाजिक गेमिंग के लिए ढांचा तैयार करता है और एक नियामक प्राधिकरण की स्थापना का प्रावधान करता है। इसमें वास्तविक धन आधारित सट्टेबाज़ी पर सख्त रोक लगाई गई है।

समुद्री क्षेत्र से जुड़े पांच प्रमुख विधेयक— बिल्स ऑफ लैडिंग विधेयक, 2025; कैरिज ऑफ गुड्स बाय सी विधेयक, 2025; कोस्टल शिपिंग विधेयक, 2025; मर्चेंट शिपिंग विधेयक, 2025 और इंडियन पोर्ट्स विधेयक, 2025 भी दोनों सदनों से पारित हुए। इन कानूनों को भारत के समुद्री व्यापार और बंदरगाह प्रबंधन को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में बड़ा सुधार माना जा रहा है।

मानसून सत्र 2025 में संसद कार्यवाही

इसके अलावा, दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2025 और जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2025 लोकसभा में पेश किए गए। ये क्रमशः व्यापार सुगमता और जीवन सुगमता बढ़ाने पर केंद्रित हैं और फिलहाल चयन समिति को भेजे गए हैं।

तीन संवेदनशील विधेयक भी इस सत्र में पेश हुए— संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025; केंद्र शासित प्रदेश शासन (संशोधन) विधेयक, 2025; और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025। इनमें से संविधान संशोधन विधेयक खास तौर पर चर्चा में है क्योंकि यह उन मंत्रियों को पद से हटाने का प्रावधान करता है जिन पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनकी सजा पांच वर्ष या उससे अधिक हो सकती है और जो 30 दिनों से अधिक समय तक हिरासत में हैं। तीनों विधेयकों को संयुक्त संसदीय समिति के पास विस्तृत समीक्षा के लिए भेजा गया है।

इसके अतिरिक्त, संसद ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की अवधि बढ़ाने और राज्य का बजट पारित करने का प्रस्ताव भी मंजूर किया।

सत्र के समापन पर सत्तापक्ष ने जोर दिया कि भारी अवरोधों के बावजूद संसद ने महत्वपूर्ण विधायी कार्य पूरे किए। वहीं विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने बहस से बचते हुए विधेयकों को जल्दबाजी में पारित कराया, जिससे लोकतांत्रिक विमर्श प्रभावित हुआ।

मानसून सत्र 2025 को केवल पारित विधेयकों के लिए नहीं, बल्कि लगातार टकराव, अधूरी बहसों और सीमित उत्पादकता के कारण याद किया जाएगा। आने वाले सत्रों पर अब निगाहें होंगी कि क्या संसद राजनीतिक मतभेदों और विधायी जिम्मेदारियों के बीच बेहतर संतुलन स्थापित कर पाएगी।


मानसून सत्र 2025 में कौन-से विधेयक पास हुए?

इस सत्र में आयकर (No. 2) विधेयक 2025, ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 और राष्ट्रीय खेल शासन विधेयक सहित कुल 15 विधेयक पारित हुए।

Operation Sindoor पर संसद में क्या चर्चा हुई?

लोकसभा और राज्यसभा में Operation Sindoor पर 35 घंटे से अधिक लंबी चर्चा हुई और प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में जवाब दिया।

ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 में क्या प्रावधान हैं?

यह बिल ई-स्पोर्ट्स, शैक्षिक गेम्स और सामाजिक गेमिंग को बढ़ावा देने तथा एक नियामक प्राधिकरण बनाने का प्रावधान करता है।

आयकर (No. 2) विधेयक 2025 का उद्देश्य क्या है?

इसका उद्देश्य 1961 के आयकर अधिनियम की व्यापक समीक्षा और कर व्यवस्था को सरल एवं पारदर्शी बनाना है।

राष्ट्रीय खेल शासन विधेयक 2025 क्यों महत्वपूर्ण है?

यह बिल खेलों के विकास, खिलाड़ियों के कल्याण और खेल संगठनों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है।

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