कांवड़ यात्रा 2025: उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला, होटल-ढाबों पर लाइसेंस और पहचान पत्र अनिवार्य
कांवड़ यात्रा देहरादून, उत्तराखंड: इस वर्ष की कांवड़ यात्रा को लेकर उत्तराखंड सरकार ने बड़े और सख्त कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर, कांवड़ मार्ग पर स्थित सभी होटल, ढाबा, ठेली और फड़ संचालकों के लिए अपना फूड लाइसेंस या पंजीकरण प्रमाण पत्र और पहचान पत्र अपनी दुकान पर प्रदर्शित करना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार का यह फैसला थूक जिहाद जैसी कथित घटनाओं पर लगाम लगाने और श्रद्धालुओं की आस्था की रक्षा के उद्देश्य से लिया गया है।
कांवड़ यात्रा – क्यों लिया गया यह फैसला? मुख्यमंत्री धामी ने बताई वजह
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि 11 जुलाई से शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा में इस बार चार करोड़ से अधिक कांवड़ियों के आने की उम्मीद है। इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और उनकी आस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया गया है। सीएम धामी ने स्पष्ट किया कि हाल के महीनों में उत्तराखंड में “थूक जिहाद” की घटनाओं में वृद्धि हुई है, जिससे श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंची है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार नहीं चाहती कि कांवड़ यात्रा के दौरान किसी भी तरह की ऐसी घटना हो जिससे करोड़ों भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ हो।
धामी ने कहा, “करोड़ों श्रद्धालु बड़ी आस्था के साथ कांवड़ यात्रा में आते हैं। हम नहीं चाहते कि उत्तराखंड में कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था से कोई खिलवाड़ हो। इसीलिए राज्य सरकार ने यह फैसला लिया है कि दुकानदारों को अपनी दुकान के आगे फूड लाइसेंस लिखना अनिवार्य होगा। अगर कोई ऐसा नहीं करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने किया फैसले का स्वागत
राज्य सरकार के इस फैसले का कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने भी खुलकर स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि “राज्य में बीते कुछ सालों में ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिसके बाद इस तरह के फैसले लेना बेहद जरूरी हो गया है।” उन्होंने जोर दिया कि यह कदम राज्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक है।
क्या हैं नए नियम? जानें पूरी जानकारी
1 जुलाई को स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार द्वारा जारी आदेश के अनुसार:
- कांवड़ यात्रा रूट पर पड़ने वाले सभी होटल, ढाबा, ठेली, फड़ और अन्य खाद्य कारोबारियों को अपने फूड लाइसेंस या पंजीकरण प्रमाणपत्र की साफ कॉपी अपनी दुकान पर साफ दिखाई देने वाली जगह पर लगानी होगी।
- छोटे व्यापारियों और ठेले-फड़ वालों को भी अपना पंजीकरण प्रमाण पत्र अपने पास रखना होगा और जरूरत पड़ने पर उसे दिखाना होगा।
- इन सभी स्थानों पर फूड सेफ्टी डिस्प्ले बोर्ड भी ऐसे स्थान पर लगाना होगा, जहां से वह ग्राहकों को स्पष्ट दिखाई दे। इससे ग्राहकों को यह पता चल सकेगा कि खाने की गुणवत्ता की जिम्मेदारी किसकी है।
नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 की धारा 55 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें 2 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।
व्यापारियों ने भी किया समर्थन
यह सुखद है कि कांवड़ यात्रा मार्ग के व्यापारियों ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि आधार कार्ड के साथ अगर दुकान का नाम लिखने का फैसला सरकार ने लिया है, तो इसमें कोई गलत बात नहीं है। यह कदम पारदर्शिता को बढ़ावा देगा और ग्राहकों के विश्वास को बढ़ाएगा।
उत्तराखंड सरकार का यह कदम कांवड़ यात्रा को सुरक्षित और आस्थापूर्ण माहौल में संपन्न कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इन कड़े नियमों से कांवड़ यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित अनुभव मिलने की उम्मीद है।



