लिव-इन रिलेशनशिप चुनौती: हरिद्वार में 5 शादीशुदा जोड़ों ने भी किया लिव-इन रजिस्ट्रेशन का आवेदन, 22 फॉर्म रिजेक्ट
लिव-इन रिलेशनशिप चुनौती:{courtesy E TV BHARAT}देहरादून/हरिद्वार: उत्तराखंड सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता (UCC) लागू किए जाने के बाद, जहां एक ओर शादी का रजिस्ट्रेशन बड़े पैमाने पर हो रहा है, वहीं लिव-इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन में नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। खासकर हरिद्वार जिले में लिव-इन के आवेदनों को प्रोसेस करना अधिकारियों के लिए मुश्किल साबित हो रहा है।
लिव-इन रिलेशनशिप चुनौती – 40 में से 22 आवेदन निरस्त, ये है मुख्य कारण
पूरे हरिद्वार जिले की बात करें तो UCC लागू होने के बाद अभी तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के लिए 40 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
- स्वीकृत: इनमें से 18 जोड़ों का रजिस्ट्रेशन सफलतापूर्वक किया जा चुका है।
- निरस्त: 22 लोगों (जोड़ों) का रजिस्ट्रेशन मानक पूर्ण न करने के कारण निरस्त किया गया है।
हरिद्वार तहसील में 5 शादीशुदा लोगों ने भी किया आवेदन
हरिद्वार तहसील में लिव-इन रजिस्ट्रेशन के लिए कुल 13 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से केवल 2 का रजिस्ट्रेशन हो पाया और 11 आवेदन रिजेक्ट कर दिए गए।
सबसे बड़ी चुनौती उन आवेदकों से आ रही है जो पहले से ही शादीशुदा हैं।
- शादीशुदा आवेदक: निरस्त किए गए 11 आवेदनों में से पांच आवेदन ऐसे लोगों के थे जो पहले से विवाहित हैं और फिर भी लिव-इन में रहने के लिए UCC के तहत रजिस्ट्रेशन करवाना चाहते थे।
- एसडीएम जितेंद्र कुमार ने बताया कि मानक पूर्ण न होने के कारण पांच शादीशुदा लोगों समेत कुल 11 आवेदन रद्द किए गए।
- जानकार बताते हैं कि मौजूदा शादी में समस्या और पार्टनर से अलग रहकर दूसरा पार्टनर तलाशना भी इस तरह के आवेदनों का कारण हो सकता है।
सरकार ने किए हैं UCC में संशोधन
लिव-इन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए उत्तराखंड सरकार ने हाल ही में UCC में कुछ संशोधन किए हैं।
- आधार की अनिवार्यता खत्म: सरकार ने अब लिव-इन रजिस्ट्रेशन में आधार कार्ड की अनिवार्यता को पूरी तरह से खत्म कर दिया है।
- वैकल्पिक पहचान पत्र: अब पासपोर्ट, वोटर आईडी कार्ड, राशन कार्ड, पैन कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस का उपयोग करके भी रजिस्ट्रेशन करवाया जा सकता है।
- वेबसाइट बदलाव: बताया जा रहा है कि रजिस्ट्रेशन की ऑनलाइन वेबसाइट पर भी कई बदलाव किए जा रहे हैं। यह रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार का चौथा संशोधन है।
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