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देव भूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी में ‘बैलेंसिंग एक्ट’ व्याख्यान: वेस्टिब्यूलर डिसऑर्डर्स पर बढ़ी जागरूकता

देव भूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी : देव भूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी (DBUU) के फिजियोथेरेपी विभाग ने चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हाल ही में यूनिवर्सिटी में “बैलेंसिंग एक्ट: कोलैबोरेटिव केयर इन वेस्टिब्यूलर डिसऑर्डर्स” (Balancing Act: Collaborative Care in Vestibular Disorders) शीर्षक से एक अतिथि व्याख्यान का सफल आयोजन किया गया।

देव भूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटीनिदान, नवीनतम उपचार और प्रबंधन

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वर्टिगो, मेनियर डिजीज, और वेस्टिब्यूलर न्यूरिटिस जैसे जटिल वेस्टिब्यूलर विकारों से पीड़ित रोगियों के निदान, नवीनतम उपचार और प्रबंधन के संबंध में जागरूकता बढ़ाना था।

मुख्य वक्ता ने किया छात्रों का मार्गदर्शन

इस विशेष शैक्षिक सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में हिमालयन हॉस्पिटल, जॉली ग्रांट के प्रोफेसर एवं सर्जन डॉ. लवनीश कुमार उपस्थित रहे। छात्रों से संवाद करते हुए उन्होंने युवाओं के उत्साह और आत्मविश्वास की सराहना की और विश्वास व्यक्त किया कि ये विद्यार्थी अपने ज्ञान और कड़ी मेहनत से चिकित्सा क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करेंगे।

चर्चा के मुख्य बिंदु:

  • ताजातरीन उपचार विधियाँ: वेस्टिब्यूलर डिसऑर्डर्स के लिए उपलब्ध सबसे नई उपचार पद्धतियों पर चर्चा।
  • उन्नत निदान तकनीकें: विकारों की सटीक पहचान के लिए उपयोग की जाने वाली आधुनिक तकनीकों की जानकारी।
  • प्रबंधन दृष्टिकोण: रोगियों के जीवन की गुणवत्ता सुधारने के लिए सहयोगात्मक देखभाल (Collaborative Care) के महत्व पर जोर।

छात्रों के लिए ज्ञानवर्धक पहल

यूनिवर्सिटी के फिजियोथेरेपी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. तृप्ति पांडेय ने इस कार्यक्रम को बेहद फायदेमंद बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम छात्रों को न केवल मेडिकल साइंस के नवीनतम पहलुओं को समझने का अवसर देते हैं, बल्कि उन्हें वास्तविक दुनिया की समस्याओं से भी जोड़ते हैं, जिससे उनके ज्ञान और कौशल में वृद्धि होती है।

डॉक्टर चारू, डीन फिजियोथेरेपी (DBUU) ने यूनिवर्सिटी की ओर से ऐसे शैक्षिक कार्यक्रमों को लगातार आयोजित करने की प्रतिबद्धता दोहराई और छात्रों के उज्जवल भविष्य की कामना की।

कार्यक्रम में छात्रों ने इंटरैक्टिव सत्र में बढ़-चढ़कर भाग लिया और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस पहल को छात्रों ने सराहा, जिससे उन्हें प्रोफेशनल विकास के लिए एक नया दृष्टिकोण मिला।कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. अलीशा, डॉ. अदिति, डॉ. मेघा और डॉ. ऋतु ने किया।

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