पुरानी टिहरी स्थापना दिवस:यादों की लौ से जगमगा उठा ‘डूबा हुआ शहर’, देहरादून में भावुक हुए टिहरीवासी
घर के आंगन में पुरानी टिहरी की एक अद्भुत प्रतिकृति

Manish Chandra
देहरादून “शहर नहीं, संस्कृति डूबी है”—यह टीस आज भी हर उस उत्तराखंडी के मन में है जिसने पुरानी टिहरी को बसते और उजड़ते देखा। 28 दिसम्बर को पुरानी टिहरी के स्थापना दिवस के अवसर पर देहरादून के बल्लूपुर (वनस्थली) में एक बेहद भावुक दीप प्रज्वलन कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहाँ दीपों की लौ में उस ऐतिहासिक शहर की स्मृतियाँ एक बार फिर जीवित हो उठीं, जो आज विकास की वेदी पर ‘टिहरी झील’ के गहरे पानी में विलीन हो चुका है।
हुबहु मॉडल में दिखी पुरानी टिहरी की ‘जीवंत’ छवि
कार्यक्रम का मुख्य केंद्र सुबोध बहुगुणा द्वारा निर्मित “पुरानी टिहरी का लैंडस्केप” रहा। पुराने दिनों को याद करते हुए सुबोध बहुगुणा ने बताया कि पुरानी टिहरी की प्रतिकृति को उन्होंने अपने पिता स्वर्गीय गोपालराम बहुगुणा के मार्ग दर्शन से तैयार किया है. पुरानी टिहरी की प्रतिकृति को तैयार करने के लिए बहुगुणा ने घरों में इस्तेमाल होने वाली टाइल्स के टुकड़े, ईंट के टुकड़े, पुराने गद्दे की रुई और सीमेंट इत्यादि का इस्तेमाल किया.उन्होंने अपने घर के आंगन में पुरानी टिहरी की एक अद्भुत प्रतिकृति तैयार की है। दीप प्रज्वलन के दौरान जब इस मॉडल के घंटाघर, राजा का दरबार, आज़ाद मैदान, बस अड्डा और टिहरी बाज़ार पर दीये रखे गए, तो वहां उपस्थित प्रवासियों की आँखें नम हो गईं।
“यह मात्र मिट्टी और सीमेंट का मॉडल नहीं है, यह हमारी आत्मा का वह हिस्सा है जिसे हमने झील के पानी को सौंप दिया।” — कार्यक्रम में उपस्थित एक बुजुर्ग।
इतिहास: 1815 में महाराजा सुदर्शन शाह ने रखी थी नींव
पुरानी टिहरी का इतिहास शौर्य और संघर्ष की कहानी है। 1815 में जब महाराजा सुदर्शन शाह ने गोरखाओं से मुक्ति के बाद भागीरथी और भिलंगना के संगम पर इस शहर की नींव रखी थी, तब यह एक छोटी सी बस्ती थी। 186 सालों तक यह शहर गढ़वाल की राजनीति, शिक्षा और संस्कृति का सबसे बड़ा केंद्र रहा।
बलिदान की गाथा: देश के विकास के लिए विसर्जन
कार्यक्रम में मौजूद कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव थापर ने कहा कि पुरानी टिहरी का बलिदान अतुलनीय है। उन्होंने कहा:
- सांस्कृतिक धरोहर: पुरानी टिहरी केवल राजधानी नहीं थी, बल्कि यह गढ़वाल की सभ्यता का ‘हृदय’ थी।
- राष्ट्र निर्माण में योगदान: आज उत्तर भारत के बड़े हिस्से को जो बिजली और पानी मिल रहा है, वह पुरानी टिहरी के विसर्जन की कीमत पर है।
- संकल्प: आने वाली पीढ़ी को इस महान इतिहास से जोड़े रखना हमारा सामूहिक कर्तव्य है।
बड़ी संख्या में टिहरी क्षेत्र के प्रवासियों ने भाग लिया
सभा में कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव थापर के साथ सुबोध बहुगुणा, भजनलाल सेमवाल, विनोद बहुगुणा, शिव प्रसाद, महेश, पवन चंडोक और बड़ी संख्या में टिहरी क्षेत्र के प्रवासियों ने भाग लिया। सभी ने एक स्वर में मांग की कि नई पीढ़ी को टिहरी के गौरवशाली अतीत से रूबरू कराने के लिए राज्य स्तर पर भी ऐसे आयोजन होने चाहिए।



