“वो हमारी भी बेटी थी…”: जब अंकिता के माता-पिता की सिसकियों से भावुक हुए मुख्यमंत्री पुष्कर धामी
अब इस मामले की जांच सीबीआई करेगी

वो हमारी भी बेटी थी:देहरादून,समय बीत जाता है, पर कुछ जख्म कभी नहीं भरते। पौड़ी की उन शांत वादियों की बेटी, अंकिता, जिसके सपनों की उड़ान को बेरहमी से रोक दिया गया था, आज एक बार फिर चर्चा में है। लेकिन इस बार चर्चा सियासत की नहीं, बल्कि एक न्यायप्रिय मुखिया की संवेदनशीलता और एक बेबस मां-बाप की अटूट उम्मीद की है।
कल जब स्वर्गीय अंकिता भंडारी के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी और माता सोनी देवी मुख्यमंत्री आवास पहुंचे, तो उनके चेहरों पर बरसों का दर्द और आंखों में न्याय की एक आखिरी लौ साफ दिखाई दे रही थी। एक तरफ प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी थे, तो दूसरी तरफ वो माता-पिता, जिन्होंने अपनी दुनिया खो दी थी।
एक भावुक मुलाकात और न्याय की पुकार
मुलाकात के दौरान जब अंकिता की मां की आंखों से आंसू छलके, तो मुख्यमंत्री ने न केवल उन्हें सुना, बल्कि एक बड़े भाई और बेटे की तरह उनकी भावनाओं का सम्मान किया। अंकिता के माता-पिता ने बस एक ही इच्छा जताई— “सीबीआई (CBI) जांच।”
मुख्यमंत्री धामी ने उनकी इस रुंधती हुई आवाज को अनसुना नहीं किया। उन्होंने भावुक स्वर में कहा, “अंकिता सिर्फ आपकी नहीं, वह हमारी भी बहन और बेटी थी। उसके साथ जो हुआ, वह पूरे राज्य के हृदय पर एक घाव है।”
न्याय की डगर: ‘अटूट संकल्प’
मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि कैसे सरकार ने पहले दिन से ही अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। एक महिला आईपीएस के नेतृत्व में एसआईटी का गठन, आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और यह सुनिश्चित करना कि उन्हें कोर्ट से एक दिन की भी जमानत न मिले—यह सब अंकिता को इंसाफ दिलाने की एक लंबी लड़ाई थी। परिणाम स्वरूप, निचली अदालत ने दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
लेकिन एक मां का दिल और पिता का विश्वास पूरी संतुष्टि चाहता था। उनकी इसी भावना का मान रखते हुए मुख्यमंत्री ने बड़ा फैसला लिया— अब इस मामले की जांच सीबीआई करेगी।
“सत्य की जीत होकर रहेगी”
मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि उनकी सरकार का उद्देश्य सिर्फ फाइलें बंद करना नहीं, बल्कि इंसाफ को उसके मुकाम तक पहुंचाना है। उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रही हालिया ऑडियो क्लिप्स का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी तथ्य को दबाया नहीं जाएगा और हर पहलू की जांच होगी।
यह केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं है; यह एक वादा है—उस बेटी से जो चली गई, और उन माता-पिता से जो आज भी अपनी बेटी की यादों के सहारे न्याय की लौ जलाए बैठे हैं।



