PIB STUDY TOUR सालार जंग संग्रहालय में भारतीय कला और विश्व संस्कृति का अद्भुत संगम, उत्तराखंड के पत्रकारों ने देखा विरासत का खजाना

हैदराबाद / देहरादून, विज्ञान की प्रयोगशालाओं में पोषण के गुर सीखने के बाद उत्तराखंड के मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने हैदराबाद के ऐतिहासिक दिल में धड़कती भारतीय विरासत के महाकुंभ विश्वप्रसिद्ध सालार जंग संग्रहालय का भ्रमण किया। पीआईबी देहरादून द्वारा आयोजित इस पांच दिवसीय प्रेस स्टडी टूर का यह सांस्कृतिक पड़ाव केवल दर्शनीय नहीं, बल्कि भारतीय शिल्प परंपरा, मूर्तिकला और हैदराबाद के ऐतिहासिक विकास को समझने का एक गहरा अकादमिक अवसर भी बना। संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला यह संग्रहालय भारत की समृद्ध कलात्मक और ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
संग्रहालय के संस्थापक परिवार की विरासत को समझते हुए पत्रकारों ने जाना कि यह विशाल खजाना निजी संग्रह का विकसित रूप है। प्रतिनिधिमंडल ने संस्थापकों की गैलरी में नवाब मीर यूसुफ अली खान (सालार जंग तृतीय) की संग्रह-साधना के विवरण को ध्यानपूर्वक पढ़ा। उनकी इस निजी संग्रह परंपरा ने ही आगे चलकर इस संग्रहालय को आकार दिया। गैलरी में प्रदर्शित दुर्लभ यूरोपीय चित्र, चीनी कलाकृतियां और परिवार की वंशावली यह बयां करती हैं कि कैसे एक ही व्यक्ति के कला के प्रति समर्पण ने देश को एक अनूठी विरासत प्रदान की।
संग्रहालय की इंडियन ब्रॉन्ज गैलरी उत्तराखंड के पत्रकारों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। यहां पल्लव काल से लेकर चोल, चालुक्य, काकतीय, विजयनगर और नायक राजवंशों के कालखंड से संबंधित कांस्य प्रतिमाओं का विशाल संग्रह मौजूद है। दल ने चोल काल की नटराज की प्रतिमा को निकट से देखा और समझा कि कैसे यह कलाकृति ब्रह्मांडीय चक्र की प्रतीकात्मक प्रस्तुति है। इसके अतिरिक्त, दक्षिण भारतीय काष्ठ कला गैलरी में लकड़ी पर की गई महीन नक्काशी ने दल को आकर्षित किया।
संग्रहालय में संरक्षित ऐतिहासिक अस्त्र-शस्त्रों के संग्रह ने भी मीडिया प्रतिनिधिमंडल का ध्यान खींचा। विभिन्न प्रकार की तलवारें, ढालें, कटार और युद्ध सामग्री न केवल तत्कालीन युद्ध तकनीक, बल्कि धातु निर्माण की उन्नत क्षमता और शिल्प कौशल की झलक प्रस्तुत करती हैं। शाही उपयोग की वस्तुओं के संग्रह में शामिल चांदी और अन्य धातु से निर्मित अलंकृत पात्रों ने पत्रकारों को उस दौर की भव्य शाही जीवनशैली और भारतीय व विदेशी शिल्प प्रभावों के संगम को समझने में मदद की।




