मुख्यमंत्री धामी ने किया उत्तराखण्ड राज्य जनजातीय महोत्सव 2026 का भव्य शुभारंभ

उत्तराखण्ड राज्य जनजातीय महोत्सव :उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून जनजातीय संस्कृति के अनूठे रंगों में सराबोर नजर आई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परेड ग्राउंड में आयोजित उत्तराखण्ड राज्य जनजातीय महोत्सव 2026 में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। राज्य जनजातीय शोध संस्थान द्वारा आयोजित इस विशेष कार्यक्रम ने न केवल देवभूमि की लोक संस्कृति को प्रदर्शित किया, बल्कि देश के 12 राज्यों से आए प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इसे एक लघु भारत का स्वरूप प्रदान किया।
जनजातीय गौरव और सांस्कृतिक विरासत का सम्मान
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में इस महोत्सव को जनजातीय समाज की जीवंत विरासत और उनके सादगीपूर्ण जीवन-दर्शन का प्रतीक बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनजातीय समाज भारतीय संस्कृति की प्राचीन परंपराओं का वह सशक्त आधार है, जो प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर जीवन जीने की कला सिखाता है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने थारू लोक गायिका स्वर्गीय रिंकू देवी राणा तथा दर्शन लाल को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए ‘आदि गौरव सम्मान’ से विभूषित किया।
सुशासन और डिजिटल सशक्तिकरण की ओर बढ़ते कदम
राज्य सरकार की संवेदनशीलता को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। उन्होंने समाज कल्याण विभाग की विभिन्न पेंशन योजनाओं के तहत 14,272.185 लाख रुपये की धनराशि एक क्लिक के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित की। यह डिजिटल पहल प्रदेश के उन 9 लाख से अधिक लाभार्थियों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है, जो अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए सरकारी सहायता पर निर्भर हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जनजातीय कल्याण का नया युग
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में जनजातीय समाज के विकास के लिए बजट में तीन गुना वृद्धि की गई है। उन्होंने ‘एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय’ और ‘प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान’ जैसी योजनाओं का उल्लेख किया, जो शिक्षा और आत्मनिर्भरता के नए द्वार खोल रही हैं। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाना और आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के लिए संग्रहालयों का निर्माण इसी कड़ी का हिस्सा है।
युवाओं के लिए ‘आदि लक्ष्य संस्थान’ और शिक्षा के नए अवसर
उत्तराखण्ड सरकार जनजातीय युवाओं के भविष्य को संवारने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि देहरादून में ‘आदि लक्ष्य संस्थान’ की स्थापना की जा रही है, जहाँ यूपीएससी और पीसीएस जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निशुल्क कोचिंग दी जाएगी। इसके साथ ही, प्रदेश के सीमांत क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता देते हुए 128 जनजातीय गांवों को समग्र विकास के लिए चिन्हित किया गया है। शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए कालसी और खटीमा जैसे क्षेत्रों में एकलव्य विद्यालयों के संचालन के साथ-साथ नए संस्थानों का निर्माण भी युद्ध स्तर पर जारी है।
परंपराओं का संरक्षण और संवैधानिक सुरक्षा
समान नागरिक संहिता (UCC) पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण तथ्य साझा किया। उन्होंने बताया कि राज्य में अनुसूचित जनजातियों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है ताकि उनकी विशिष्ट परंपराएं और रीति-रिवाज अक्षुण्ण रह सकें। सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून लागू करना भी सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है। सरकार का लक्ष्य है कि जनजातीय समाज का प्रत्येक व्यक्ति विकास की मुख्यधारा से जुड़े और अपनी जड़ों पर गर्व कर सके।



