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HOLI SONG:होली के गीतों का अपना एक अलग स्थान है,1959 की फिल्म ‘नवरंग’ का गाना “अरे जा रे हट नटखट” एक मील का पत्थर

गाने की खास बातें

Manish Chandra

HOLI SONG:होली के गीतों का अपना एक अलग स्थान है,1959 की फिल्म ‘नवरंग’ का गाना “अरे जा रे हट नटखट” एक मील का पत्थर भारतीय सिनेमा के इतिहास में होली के गीतों का अपना एक अलग स्थान है, लेकिन 1959 की फिल्म ‘नवरंग’ का गाना “अरे जा रे हट नटखट” एक ऐसा मील का पत्थर है जिसे आज भी होली के सबसे बेहतरीन गानों में गिना जाता है। सी. रामचंद्र के संगीत और भारत व्यास के शब्दों से सजा यह गीत आज भी हर पीढ़ी को थिरकने पर मजबूर कर देता है।

गाने की मेकिंग और खास बातें (Making of the Song)

इस गाने का निर्माण महान निर्देशक वी. शांताराम के निर्देशन में हुआ था। यह गाना केवल अपने संगीत के लिए ही नहीं, बल्कि इसके फिल्मांकन के तकनीकी पक्ष के लिए भी मशहूर है:

  • दोहरी भूमिका (Dual Role in Dance): इस गाने की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें मुख्य अभिनेत्री संध्या ने एक साथ पुरुष (कृष्ण) और महिला (राधा) दोनों के रूप में नृत्य किया है। स्क्रीन पर उन्हें बड़ी चतुराई से एक ही शॉट में दोनों रूपों में दिखाया गया था, जो उस दौर के हिसाब से एक बड़ा तकनीकी चमत्कार था।
  • कलाकारों की मेहनत: संध्या ने इस गाने के लिए महीनों तक अभ्यास किया था। गाने में हाथी और असली पशुओं का उपयोग किया गया था, जो शांताराम की फिल्मों की भव्यता का प्रतीक था।
  • संगीत: सी. रामचंद्र (Chitalkar) ने इस गीत को पारंपरिक शास्त्रीय संगीत और होली के लोक संगीत का अद्भुत मिश्रण बनाया है। आशा भोंसले और महेंद्र कपूर की आवाज ने इसमें जान डाल दी।

अभिनेत्री संध्या: कला और समर्पण की प्रतिमूर्ति

अभिनेत्री संध्या (विजया देशमुख) का भारतीय सिनेमा में योगदान अद्वितीय रहा है। वह अपनी फिल्मों में केवल एक अभिनेत्री नहीं, बल्कि एक समर्पित नृत्यांगना और कलाकार के रूप में जानी जाती थीं:

  • अभिनय यात्रा: उनकी खोज स्वयं वी. शांताराम ने की थी। उन्होंने ‘झनक झनक पायल बाजे’, ‘दो आँखें बारह हाथ’ और ‘पिंजरा’ जैसी ऐतिहासिक फिल्मों में काम किया।
  • मेहनत और लगन: ‘नवरंग’ फिल्म में उन्होंने एक ऐसी पत्नी का किरदार निभाया था जो असल जिंदगी में साधारण दिखती है, लेकिन अपने पति (एक कवि) की कल्पनाओं में एक खूबसूरत अप्सरा बन जाती है। इस गाने में उनके नृत्य कौशल की दुनिया आज भी कायल है।
  • व्यक्तिगत जीवन: वह वी. शांताराम की पत्नी थीं और उन्होंने अपनी पूरी कलात्मक ऊर्जा उनके स्टूडियो ‘राजकमल कलामंदिर’ को समर्पित कर दी थी।

गीत के बोल और भाव (Lyrics and Meaning)

Lyrics By: भरत व्यास

मुखड़ा: अटक-अटक झटपट पनघट पर, चटक मटक इक नार नवेली… भाव: यह हिस्सा राधा के पनघट पर जाने और कान्हा की छेड़छाड़ का वर्णन करता है।

अंतरा 1: अरे जा रे हट नटखट, ना छू रे मेरा घूँघट… भाव: यहाँ नायिका नायक को छेड़खानी करने से रोकती है और कहती है कि मुझे भोली-भाली मत समझो।

अंतरा 2: तक-तक ना मार पिचकारी की धार, कोमल बदन सह सके ना ये मार… भाव: होली की मस्ती और रंगों की बौछार का सुंदर वर्णन है जहाँ नायिका पिचकारी की धार से बचने की कोशिश कर रही है।

अंतरा 3: धरती है लाल आज, अम्बर है लाल, उड़ने दे गोरी गालों का गुलाल… भाव: यह होली के उत्साह का चरमोत्कर्ष है जहाँ चारों ओर केवल गुलाल और खुशियाँ हैं।

Photo -by YOU TUBE Screen shots

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