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हो जाएगी सुबह…

chandra manish

हो जाएगी सुबह…तुम्हारी बेरुखी रेगिस्तान की अथाह मरुभूमि है…

इसी बियाबान में कुदरत ने तुम्हारे आगोश में खिलते देखे हैं फूल.

बसंती हवा की खुशबू और नमी महसूस की है…

रेतली तपती जमीन कैसे खिल गई थी…

हो जाएगी सुबह…दूर चारों दिशाओं में फैले हुए तुम्हारे हाथ

बावजूद हवा के बवंडरों के आसमान की तरफ उठा तुम्हारा चमकता चेहरा.…और दूर चारों दिशाओं में फैले तुम्हारे हाथ ..

सब समेट लेना चाहते थे ..
जैसे देना चाहते थे सबको खुशियां…

तुम्हारी संतुष्टि के भावों से लगता था रेत के मैदान में बरस आया है सावन…
और एक बड़ा सा समंदर..
तैर रही हैं जिसमें कश्तियां … और तुम ये सब देखकर
चहक गई हो .. रजनीगंधा और मोगरे के फूल सी महक गई हो .…

जैसे बरसों बाद किसी उजाड़ डाली पर फिर से उग आई हों हरी कोपलें..

पंछियों ने भी कूकती आवाज़ से तुम्हारे जी उठने का संदेश पूरे रेगिस्तान में सबको बता दिया है…

तुम्हारी मुस्कान से सब कुछ ठीक था अचानक जब से तुम मुरझाए हो ..
वीराना तुम्हारी हरियाली के फिर वो बेताब मंजर ढूंढ रहा है..

तुम्हें हंसना होगा खिलना होगा … चमन की खातिर सितार के संगीत सा बजना होगा …

जब तुम्हारी अंगड़ाई से लहराएंगे बांसुरी के सुर
रेगिस्तान में मीठे दरिया का तालाब होगा…

लौट आएगी नमी तपती जमीन पर …हवा में लहराता तुम्हारा पल्लो बादलों से टकरायेगा ..बरस जाएंगी बूंदें…

ना मानो तो सूरज निकलने से पहले भोर की सुगंध के साथ एक बार आईना देखो..
तुम्हारी हल्की सी मुस्कान से..

हो जाएगी सुबह…

Photo – Gemini

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