उत्तराखंड में चुनावी हैट्रिक की तैयारी: धामी कैबिनेट के विस्तार में पांच नए चेहरों को मिली ज़िम्मेदारी

देहरादून,उत्तराखंड की राजनीति में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। भाजपा द्वारा राज्य में लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने के लक्ष्य के साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी कैबिनेट का विस्तार किया है। चुनाव से ठीक नौ महीने पहले शुक्रवार, 20 मार्च को हुए इस फेरबदल में पांच अनुभवी और क्षेत्रीय क्षत्रपों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है। मंत्रिमंडल में शामिल किए गए खजान दास, भरत चौधरी, राम सिंह कैड़ा, मदन कौशिक और प्रदीप बत्रा का चयन क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
देहरादून की राजपुर रोड सीट से विधायक खजान दास अनुसूचित जाति वर्ग के एक सशक्त चेहरे के रूप में उभरे हैं। जमीनी स्तर से राजनीति शुरू करने वाले खजान दास पूर्व में भी शिक्षा मंत्री रह चुके हैं और संगठन में उनकी पकड़ काफी गहरी मानी जाती है। वहीं, रुद्रप्रयाग से विधायक भरत चौधरी ने ग्राम प्रधान से लेकर कैबिनेट मंत्री तक का सफर तय किया है। छात्र राजनीति से निकले भरत चौधरी ने अपनी निष्ठा और कार्यशैली से नेतृत्व का भरोसा जीता है। विशेष बात यह रही कि उन्होंने मंत्री पद की शपथ संस्कृत भाषा में लेकर अपनी सांस्कृतिक जड़ों का परिचय दिया।
कुमाऊं मंडल के समीकरणों को साधने के लिए भीमताल से विधायक राम सिंह कैड़ा को मंत्रिमंडल में स्थान दिया गया है। छात्र राजनीति से करियर शुरू करने वाले कैड़ा निर्दलीय विधायक के रूप में भी अपनी ताकत दिखा चुके हैं। उन्हें ग्रामीण और किसान वर्ग का प्रतिनिधि माना जाता है। दूसरी ओर, हरिद्वार की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले मदन कौशिक की कैबिनेट में वापसी हुई है। राज्य गठन के बाद से हर चुनाव जीतने वाले कौशिक पूर्व में प्रदेश अध्यक्ष और कई सरकारों में वरिष्ठ मंत्री रह चुके हैं। उनकी प्रशासनिक समझ और चुनावी रणनीति सरकार के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है।
रुड़की से तीसरी बार के विधायक प्रदीप बत्रा को भी इस विस्तार में जगह मिली है। नगर पालिका अध्यक्ष से अपना सफर शुरू करने वाले बत्रा की व्यापारिक वर्ग और शहरी मतदाताओं के बीच मजबूत पकड़ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विस्तार के जरिए सरकार ने गढ़वाल और कुमाऊं के साथ-साथ मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों के बीच एक बेहतर तालमेल बिठाने की कोशिश की है। अनुभवी और जमीनी नेताओं का यह मेल आगामी चुनावों में भाजपा के लिए ‘मिशन 2027’ की राह आसान कर सकता है। अब देखना यह होगा कि ये नए चेहरे अपने विभागों के माध्यम से जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतरते हैं।



