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उत्तराखंड हाईकोर्ट में अधिवक्ताओं की पदोन्नति और नई नियुक्तियां, शासन ने सौंपी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

नैनीताल/देहरादून: उत्तराखंड सरकार के विधि एवं न्याय विभाग ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में सरकारी मामलों की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसके तहत, कई अधिवक्ताओं को पदोन्नत किया गया है, जबकि 10 नए अधिवक्ताओं को शासन के पैनल में शामिल किया गया है।

शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, वर्तमान में उप महाधिवक्ता के रूप में कार्यरत पुष्पा भट्ट को उनके उत्कृष्ट कार्य को देखते हुए अपर महाधिवक्ता के पद पर पदोन्नत किया गया है। इसके अतिरिक्त, स्थायी अधिवक्ता बीएस परिहार और विश्व दीपक विशैन को अब अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता के रूप में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। आपराधिक मामलों की पैरवी कर रहे ब्रीफ होल्डर प्रमोद तिवारी को सहायक शासकीय अधिवक्ता और सिविल मामलों के ब्रीफ होल्डर एसएस चौधरी को स्थायी अधिवक्ता के पद पर पदोन्नति मिली है।

इसके साथ ही, शासन ने 10 नए अधिवक्ताओं को भी सरकारी मुकदमों की पैरवी के लिए अपने पैनल में शामिल किया है। इनमें राहुल वर्मा को सीधे अपर महाधिवक्ता नियुक्त किया गया है, जबकि वासवानंद मौलखी अब उप महाधिवक्ता के रूप में अपनी सेवाएं देंगे। तुमुन नैनवाल, दिनेश चौहान, और नन्दन सिंह कन्याल को सहायक शासकीय अधिवक्ता के पद पर नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, एनके पपनोई को स्थायी अधिवक्ता, विजय खंडूड़ी और चित्रार्थ कांडपाल को ब्रीफ होल्डर क्रिमिनल, जबकि चंद्रशेखर जोशी और तरुण मोहन को ब्रीफ होल्डर सिविल के रूप में आबद्ध किया गया है।

उत्तराखंड शासन के न्याय अनुभाग द्वारा जारी इस आदेश को राज्यपाल की स्वीकृति मिल गई है। आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह एक व्यावसायिक आबंधन है, न कि किसी ‘सिविल पद’ पर नियुक्ति। राज्य सरकार बिना किसी पूर्व सूचना या कारण बताए इस आबंधन को किसी भी समय समाप्त कर सकती है। वहीं, आबद्ध अधिवक्ता भी लिखित सूचना देकर कभी भी इस जुड़ाव को समाप्त कर सकते हैं। महत्वपूर्ण शर्त यह है कि इस दौरान ये अधिवक्ता उत्तराखंड राज्य के विरुद्ध किसी भी न्यायालय में किसी अन्य व्यक्ति/संस्था की पैरवी नहीं करेंगे और न ही राज्य के विरुद्ध कोई कानूनी सलाह देंगे।

शासन का यह कदम हाईकोर्ट में सरकारी मामलों की प्रभावी और कुशल पैरवी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। नई नियुक्तियों और पदोन्नतियों से विधि एवं न्याय विभाग को मजबूती मिलेगी और न्यायालय में सरकार का पक्ष बेहतर ढंग से रखा जा सकेगा।

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