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राजभवन में सर्वधर्म गोष्ठी: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में महिला अधिकारियों की भूमिका की सराहना

राजभवन में सर्वधर्म गोष्ठी : वर्तमान राष्ट्रव्यापी परिदृश्य के मद्देनजर, राजभवन, देहरादून में राष्ट्रीय एकता को समर्पित एक महत्वपूर्ण सर्वधर्म गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर देश की एकता और अखंडता के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराई।

राजभवन में सर्वधर्म गोष्ठी – कर्नल सोफिया कुरेशी,विंग कमांडर व्योमिका सिंह की सराहना

राजभवन में सर्वधर्म गोष्ठी को संबोधित करते हुए राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने कहा कि यह आयोजन राष्ट्र के प्रति हमारे साझा उत्तरदायित्व को दर्शाता है। उन्होंने जोर दिया कि कैसे धर्म, जाति और मत की सीमाओं से परे सभी एकजुट खड़े हैं, ठीक उसी तरह जैसे सीमाओं पर सेना देश की रक्षा कर रही है। एक पूर्व सैनिक के तौर पर उन्होंने सैनिकों के मनोबल के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि यह गोष्ठी उनके मनोबल को सशक्त करने का प्रतीक है। राज्यपाल ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के माध्यम से आतंकवाद पर सेना की कार्रवाई का उल्लेख किया और कर्नल सोफिया कुरेशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह जैसी महिला अधिकारियों की भूमिका की सराहना की, जिन्हें उन्होंने सशक्त भारत की सशक्त मातृशक्ति बताया।

राज्यपाल ने इस बात पर बल दिया कि सभी धर्मों का मूल संदेश वास्तव में एक ही है – एकता, करुणा और शांति। उन्होंने विभिन्न धर्मों के सिद्धांतों का उदाहरण दिया: हिंदू धर्म का ‘सर्वे भवंतु सुखिनः’, सिख धर्म का ‘एकम’ भाव, बुद्ध का ‘अपने दीपक खुद बनो’, जैन धर्म का अहिंसा परमो धर्मः, इस्लाम का विभाजन न करने का संदेश, और ईसाई धर्म का शांति फैलाने वालों को ईश्वर की संतान बताना। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि इन सभी शिक्षाओं का सार धार्मिक सद्भाव और मानव कल्याण है।

मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में कहा कि जब भी देश पर संकट आया है, भारतीय समाज के सभी वर्गों ने धर्म, जाति और क्षेत्र से ऊपर उठकर एकजुटता का परिचय दिया है। उन्होंने वेदों के श्लोक ‘संगच्छ ध्वं संवदद ध्वं सं वो मनांसि जानताम्’ का उल्लेख करते हुए साझा लक्ष्य और एकजुट होकर चलने के महत्व को रेखांकित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्म का मूल उद्देश्य सत्य, प्रेम और समरसता की स्थापना है। उन्होंने विभिन्न धार्मिक हस्तियों – भगवान श्रीराम, भगवान श्रीकृष्ण, गुरु गोविंद सिंह जी, ईसा मसीह और पैगम्बर मोहम्मद साहब के उदाहरण दिए, जिन्होंने धर्म और न्याय के लिए संघर्ष किया या शांति का संदेश दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अधर्म के सामने चुप रहना भी अधर्म है और भारत हमेशा सत्य और न्याय के साथ खड़ा रहा है। राजभवन में सर्वधर्म गोष्ठी में उत्तराखंड की वीर भूमि की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसने हमेशा राष्ट्रभक्ति और बलिदान का प्रदर्शन किया है, और वर्तमान समय में सैनिकों के साथ मजबूती से खड़े रहना आवश्यक है।

इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद मुनि ने कहा कि विभिन्न पूजा पद्धतियों के बावजूद, सभी की सर्वोच्च भक्ति राष्ट्र भक्ति है। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने भारत की सुंदरता और सभी भारतीयों के ‘भारत माता की संतान’ होने पर जोर दिया। बौद्ध प्रतिनिधि सोनम चोग्याल, ब्रदर जोसेफ एम. जोसेफ और सरदार गुरबक्श सिंह राजन ने भी अपने विचार साझा किए और भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता को अक्षुण्ण बनाए रखने के संकल्प को दोहराया।

इस महत्वपूर्ण सर्वधर्म गोष्ठी में सचिव राज्यपाल रविनाथ रामन, महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी सहित विभिन्न पंथों के अनुयायी, समाजसेवियों और गणमान्य व्यक्तियों ने प्रतिभाग किया। यह आयोजन राष्ट्रीय एकता, धार्मिक सद्भाव और देश के प्रति सामूहिक समर्पण की भावना को सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध हुआ।

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