शंकराचार्य पद विवाद:प्रयागराज माघ मेला में शंकराचार्य पद को लेकर विवाद गहराया प्रशासन ने मांगा जवाब

शंकराचार्य पद विवाद : प्रयागराज में आयोजित माघ मेला 2025-26 के दौरान ज्योतिषपीठ के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के पद और उनके संगम स्नान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मेला विकास प्राधिकरण ने रविवार आधी रात को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में एक नोटिस भेजकर 24 घंटे के भीतर उनसे जवाब मांगा है। नोटिस में उनके द्वारा स्वयं को ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य बताए जाने के आधार पर सवाल उठाए गए हैं।
शंकराचार्य पद विवाद , प्रशासन ने स्पष्टीकरण मांगा है
मेला विकास प्राधिकरण का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन एक मामले के अनुसार, अदालत ने 14 अक्टूबर 2022 को आदेश दिया था कि अपील के अंतिम निस्तारण तक किसी भी धर्माचार्य का ज्योतिषपीठ शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेक नहीं किया जाएगा। प्राधिकरण के अनुसार अभी तक इस आदेश में कोई बदलाव नहीं हुआ है, फिर भी माघ मेला क्षेत्र के शिविर में लगाए गए बोर्ड पर स्वयं को शंकराचार्य के रूप में प्रदर्शित करना न्यायालय के आदेश की अवहेलना की श्रेणी में आता है। प्रशासन ने स्पष्टीकरण मांगा है कि वे किस आधार पर अपने नाम के साथ शंकराचार्य शब्द का प्रयोग कर रहे हैं।
यह कानूनी नोटिस ऐसे समय में आया है जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच पहले से ही टकराव चल रहा है। उन पर आरोप है कि मौनी अमावस्या के दिन उन्होंने अपने सैकड़ों अनुयायियों के साथ बिना अनुमति पालकी पर सवार होकर संगम जाने का प्रयास किया और बैरिकेडिंग तोड़ी। वहीं दूसरी ओर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनके साधुओं के साथ मारपीट और बदसलूकी की गई।
फिलहाल स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पिछले तीन दिनों से अपने शिविर के बाहर पालकी पर ही बैठे हैं और उन्होंने अन्न-जल त्याग दिया है। उनका कहना है कि वे धरना नहीं दे रहे बल्कि पुलिस की अभिरक्षा में हैं, क्योंकि पुलिस ने उन्हें ससम्मान स्नान करने से रोका था। उन्होंने मांग की है कि जब तक प्रशासन उन्हें ससम्मान स्नान की अनुमति नहीं देता और माफी नहीं मांगता, वे वहीं बैठे रहेंगे।
इस घटनाक्रम के बाद माघ मेला क्षेत्र में तनाव और हलचल बढ़ गई है। अब सभी की नजरें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से दिए जाने वाले जवाब और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। संगम तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच इस विवाद ने धार्मिक और प्रशासनिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।



