कविता
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ये है एक टिहरी
*अरुणा मनवर* ये एक थी टिहरी नहीं..ये है, एक है टिहरी… जो जिंदा है,,,तुम्हारी रग रग में.. पग पग मेंतुम्हारे…
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चंद्रा मनीष बूढ़ा किरायेदार, बस मरने से पहले..चला जाऊंगा .. तुम्हारा घर मंदिर हैअब यहां से कहां जाऊंगायूं नहीं कहते…
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*अरुणा मनवर* ये एक थी टिहरी नहीं..ये है, एक है टिहरी… जो जिंदा है,,,तुम्हारी रग रग में.. पग पग मेंतुम्हारे…
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तुम कभी आ जाना तुम कभी आ जाना सपने मेंतुम्हारा आना अच्छा लगेगा बेशक देती रहना गालियांदेना बद्दुआ.. बार-बार वो…
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