Main Slideकहानी कविता
यही तो है प्रेम वाली कविता
डॉ बीना सिंह रागी

प्रेम, है निराकार
नहीं कोई आकार
नहीं नौलखा हार
प्रेम सौगात उपहार
प्रेम नहीं व्यापार
ना जीत ना हार
तन म न एकसार
प्रेम जीवन का सार
प्रेम है निर्मल धार
ना फूल ना खार
प्रेम वीना का संसार
प्रेम रागी का आधार
Photo – Gemini
डॉ बीना सिहं रागी
भिलाई छत्तीसगढ़
स्वतंत्र लेखिका कवित्री सायरा
गीत गजल कविता छंद
माहिया दोहे
लघु कथा
तकरीबन 30 सजा संग्रह
अकल कृति शब्द समिधा
विभिन्न पत्र पत्रिकाओं अखबार में रचनाओं का प्रकाशन
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में प्रस्तुति
आकाशवाणी दूरदर्शन टीवी चैनल में समय-समय पर प्रस्तुति
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