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आपदा प्रबंधन पर उत्तराखंड सरकार का फोकस: मुख्य सचिव ने दिए अहम निर्देश

आपदा प्रबंधन :देहरादून उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन को और मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने कमर कस ली है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में आज सचिवालय में हुई राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) और राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आपदा से जुड़े कार्यों को गति देना और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयारी करना था।

आपदा प्रबंधन – SDRF को मिलेगा प्रशिक्षण फंड

बैठक में पुलिस महानिदेशक को एसडीआरएफ (राज्य आपदा मोचन बल) दल के प्रशिक्षण के लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 की बची हुई राशि को वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 में खर्च करने की अनुमति दी गई। इसके साथ ही, चंपावत और पौड़ी जिलों को राहत, बचाव, पुनर्निर्माण और पुनर्प्राप्ति कार्यों के लिए दूसरी किस्त जारी करने पर भी सहमति बनी। यह राशि इन जिलों में आपदा प्रभावित लोगों की मदद में तेजी लाएगी।

आपदा प्रभावितों को तत्काल मिले मुआवजा

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि मानव-वन्यजीव संघर्ष सहित अन्य आपदाओं से प्रभावित लोगों को मिलने वाली अनुग्रह राशि (मुआवजा) का वितरण तुरंत किया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे सभी लंबित मामलों का तत्काल निपटारा किया जाए ताकि प्रभावितों को समय पर मदद मिल सके।

हेली सेवाओं के लिए बनेगी SOP

आपदा जैसी आपातकालीन स्थितियों में हेलीकॉप्टरों के प्रभावी उपयोग के लिए मुख्य सचिव ने आपदा विभाग को एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने के निर्देश दिए। यह SOP बचाव कार्यों को अधिक कुशल और समन्वित बनाएगी।

नदी संरक्षण और बाढ़ सुरक्षा पर जोर

बैठक में देहरादून की रिस्पना नदी के चैनलाइजेशन और ड्रेजिंग (गाद निकालने) के लिए सिंचाई और लोक निर्माण विभाग को मिलकर प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया। मुख्य सचिव ने यह भी निर्देश दिए कि प्रदेश की सभी बड़ी नदियों का विस्तृत अध्ययन कर एक समग्र कार्ययोजना बनाई जाए। इसके तहत प्राथमिकता के आधार पर बाढ़ प्रभावित बस्तियों की सुरक्षा के लिए प्रस्ताव तैयार करने के लिए भी कहा गया है।

बायो-इंजीनियरिंग का होगा इस्तेमाल

मुख्य सचिव ने आपदा न्यूनीकरण निधि के तहत किए जा रहे कार्यों में बायो-इंजीनियरिंग और बायो-फेंसिंग जैसी तकनीकों का उपयोग करने पर विशेष जोर दिया। इस संबंध में वन विभाग द्वारा जाइका (JICA) के सहयोग से किए जा रहे कार्यों की जानकारी के लिए एक कार्यशाला आयोजित करने का भी सुझाव दिया गया।

इस महत्वपूर्ण बैठक में सचिव शैलेश बगौली, विनोद कुमार सुमन, युगल किशोर पंत, अपर सचिव विनीत कुमार, आनंद स्वरूप सहित कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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