केदारनाथ हेलीकॉप्टर निगरानी: सुरक्षा पर बढ़ा फोकस, DGCA की कड़ी निगरानी में फिर शुरू हुईं हेली सेवाएं
केदारनाथ हेलीकॉप्टर निगरानीदेहरादून/केदारनाथ धाम से गुप्तकाशी लौटते समय 15 जून को एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद, केदारनाथ यात्रा के लिए हेली सेवाओं को 17 जून से दोबारा शुरू कर दिया गया है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद, उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) और नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं को रोकने के लिए केदारघाटी में संचालित सभी हेलीकॉप्टरों पर विशेष निगरानी बढ़ा दी है। DGCA की टीम स्वयं इस पर कड़ी नजर रख रही है।
बढ़ती दुर्घटनाएं और केदारनाथ हेलीकॉप्टर निगरानी
उत्तराखंड चारधाम यात्रा 30 अप्रैल को शुरू हुई थी, और 2 मई से केदारनाथ धाम के लिए हेली सेवाओं का संचालन प्रारंभ हुआ। दुर्भाग्यवश, इन 45 दिनों के भीतर, 15 जून की दुर्घटना सहित कुल 5 हेली दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 13 लोगों की जान चली गई। 15 जून को हुए हेलीकॉप्टर क्रैश के बाद, यूकाडा पूरी तरह से अलर्ट पर है और चारधाम यात्रा के लिए संचालित सभी हेली सेवाओं पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
सुरक्षा उपायों में वृद्धि:
यूकाडा ने संबंधित संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने और सूचनाओं का आदान-प्रदान सुनिश्चित करने के लिए एक टीम का गठन किया है। यह टीम हेलीकॉप्टर पायलटों को उचित और सटीक जानकारी प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करेगी।
15 जून की दुर्घटना के बाद 16 जून तक हेली सेवाओं पर अस्थायी रोक लगा दी गई थी। 17 जून से सेवाएं फिर से शुरू होने के साथ ही, सहस्त्रधारा हेलीपोर्ट पर एक विशेष निगरानी टीम तैनात की गई है। इस टीम में मौसम विभाग के अधिकारी, DGCA के अधिकारी और हेली ऑपरेटर्स शामिल हैं। यूकाडा का मुख्य लक्ष्य पायलटों को मौसम संबंधी सटीक जानकारी उपलब्ध कराना है।
मानकों की अनदेखी पर कड़ी नजर:
यह भी सामने आया है कि कुछ हेली ऑपरेटर्स द्वारा सुरक्षा मानकों की अनदेखी की शिकायतें मिली हैं। इसे देखते हुए, ऑपरेटर्स पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जाए।
नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण की सीईओ सोनिका ने बताया, “16 जून तक हेली सेवाओं पर रोक थी, लेकिन आज यानी 17 जून से हेली सेवाओं को सुचारु कर दिया गया है। देहरादून स्थित सहस्त्रधारा हेलीपोर्ट पर IMD (भारतीय मौसम विज्ञान विभाग) के वैज्ञानिक, DGCA की टीम, ऑपरेटर्स और पायलट के बीच समन्वय बनाने के लिए एक टीम बिठाई गई है। इससे मौसम की जानकारी के साथ ही DGCA द्वारा जारी ऑफ सर्कुलर को लागू करने और सूचनाओं का आदान-प्रदान सुचारु रूप से हो सकेगा।”



