सीएम धामी ने लिखा उत्तराखंड का राजनीतिक इतिहास,पूरे किए 4 साल,ND तिवारी के बाद दूसरे सबसे लंबे कार्यकाल वाले CM
Mneesh Chandra
उत्तराखंड का राजनीतिक इतिहास : देहरादून, उत्तराखंड के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (CM Pushkar Singh Dhami) ने 4 जुलाई 2025 को मुख्यमंत्री के रूप में अपने 4 साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है। इस उपलब्धि के साथ, वे उत्तराखंड के 25 साल के इतिहास में पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत नारायण दत्त तिवारी (ND Tiwari) के बाद दूसरे ऐसे मुख्यमंत्री बन गए हैं, जिन्होंने लगातार चार साल तक इस पद को संभाला है। सीएम धामी ने लिखा उत्तराखंड का राजनीतिक इतिहास हालांकि, सीएम धामी का यह कार्यकाल दो अलग-अलग सरकारों का हिस्सा रहा है।
उत्तराखंड का राजनीतिक इतिहास और धामी का दो सरकारों का सफर:
पुष्कर सिंह धामी ने पहली बार 4 जुलाई 2021 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद, 2022 के विधानसभा चुनावों में खटीमा सीट से हारने के बावजूद, बीजेपी हाईकमान ने उन पर अपना भरोसा बरकरार रखा और उन्हें दोबारा मुख्यमंत्री बनाया जो उनके मजबूत नेतृत्व और पार्टी के विश्वास को दर्शाता है।

चुनौतियों भरा कार्यकाल और हाईकमान का भरोसा:
उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में मुख्यमंत्रियों के बार-बार बदले जाने का रिवाज रहा है। ऐसे में पुष्कर सिंह धामी के सामने भी यह चुनौती थी कि क्या वे नारायण दत्त तिवारी की तरह अपना कार्यकाल पूरा कर पाएंगे। अपनी सीट हारने और प्रशासनिक अनुभव की कमी के शुरुआती सवालों के बावजूद, धामी ने बीजेपी हाईकमान की उम्मीदों पर खरा उतरकर दिखाया है। चंपावत उपचुनाव में रिकॉर्ड जीत ने उनकी लोकप्रियता को और मजबूत किया आखिरकार काबिल धामी ने अपनी स्वच्छ और स्पष्ट राजनीतिक चेतना से रच दिया उत्तराखंड का राजनीतिक इतिहास
देशभर में चर्चित धामी सरकार के बड़े फैसले:
अपने 4 साल के कार्यकाल में सीएम धामी ने कई ऐसे ऐतिहासिक और साहसिक फैसले लिए, जिनकी चर्चा न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश में हुई।1 इन फैसलों ने पुष्कर सिंह धामी की पहचान एक राष्ट्रीय नेता (National Leader) के रूप में स्थापित की:
- समान नागरिक संहिता (UCC) लागू: उत्तराखंड (Uttarakhand UCC) देश का पहला राज्य बना जिसने समान नागरिक संहिता लागू की। यह बीजेपी के दशकों पुराने वादे को पूरा करने जैसा था और इस कदम ने उत्तराखंड को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया।
- नकल विरोधी कानून: पेपर लीक माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए धामी सरकार ने ‘उत्तराखंड नकल विरोधी कानून’ (Anti-Copying Law Uttarakhand) लागू किया। इस कानून के तहत 100 से अधिक गिरफ्तारियां हुईं, जिससे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता (Transparency in Recruitment) बढ़ी।
- महिला सशक्तिकरण पहलें: महिलाओं के उत्थान के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू कीं, जिनमें सरकारी नौकरियों में 30% क्षैतिज आरक्षण (30% Reservation for Women), महिला सारथी योजना, लखपति दीदी योजना (Lakhpati Didi Yojana), एकल महिला स्वरोजगार योजना और ड्रोन दीदी योजना शामिल हैं।
- अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई: सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण (Encroachment Drive Uttarakhand) के खिलाफ धामी सरकार ने कड़ा रुख अपनाया। 6,500 एकड़ से अधिक भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया। सरकार ने इस कार्रवाई को निष्पक्ष बताया, जिसका उद्देश्य सरकारी संसाधनों की रक्षा करना था।
- कृषि एवं बागवानी को प्रोत्साहन: पहाड़ी क्षेत्रों में सेब और कीवी की खेती (Apple and Kiwi Cultivation Uttarakhand) को बढ़ावा देने के लिए विशेष मिशन शुरू किए गए। इसके अलावा, पोल्ट्री फार्मिंग के लिए सब्सिडी (Poultry Farming Subsidy) नीति भी लागू की गई।
- सामाजिक कल्याण योजनाएं: वृद्धावस्था पेंशन और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के वेतन में वृद्धि (Anganwadi Workers Salary Hike) जैसे कदमों से सामाजिक सुरक्षा मजबूत हुई। स्ट्रीट चिल्ड्रन पॉलिसी और पर्यावरण मित्रों के लिए मृतक आश्रित नियमावली भी उनके कार्यकाल की प्रमुख पहलें रहीं।
चुनौतियाँ और आलोचनाएँ:
उपलब्धियों के साथ-साथ, धामी के कार्यकाल में कुछ बड़ी चुनौतियाँ और आलोचनाएँ भी सामने आईं:
- 2022 विधानसभा चुनाव में हार: खटीमा सीट से उनकी व्यक्तिगत हार एक बड़ा झटका थी, हालांकि पार्टी ने उन पर भरोसा कायम रखा।
- प्रशासनिक अनुभव की कमी पर सवाल: शुरुआती दौर में विपक्ष द्वारा उनके प्रशासनिक अनुभव पर सवाल उठाए गए।
- बेरोजगारी और पलायन: उत्तराखंड में बेरोजगारी (Unemployment in Uttarakhand) और पहाड़ी क्षेत्रों से पलायन (Migration from Hills) की समस्या आज भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिस पर अभी भी प्रभावी समाधान की प्रतीक्षा है।
- राज्य पर बढ़ता कर्ज: उत्तराखंड पर बढ़ता कर्ज (Uttarakhand State Debt) एक चिंता का विषय बना हुआ है, जिसके वित्तीय वर्ष 2025-26 तक एक लाख करोड़ रुपये पार करने का अनुमान है।
- अतिक्रमण अभियान पर आलोचना: अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को कुछ समुदायों द्वारा पक्षपातपूर्ण करार दिया गया, हालांकि सरकार ने पारदर्शिता का दावा किया।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों का कार्यकाल:
9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद से, केवल एन.डी. तिवारी ही ऐसे मुख्यमंत्री रहे हैं जिन्होंने अपना पूरा पांच साल का कार्यकाल पूरा किया है। पुष्कर सिंह धामी अब उस सूची में दूसरे मुख्यमंत्री बनने की ओर अग्रसर हैं, जिन्होंने लगातार 4 साल का कार्यकाल पूर्ण किया है।
- नित्यानंद स्वामी: 9 नवंबर 2000 – 29 अक्टूबर 2001
- भगत सिंह कोश्यारी: 30 अक्टूबर 2001 – 1 मार्च 2002
- एनडी तिवारी: 2 मार्च 2002 – 7 मार्च 2007 (पूर्ण 5 साल)
- भुवन चंद्र खंडूड़ी: 7 मार्च 2007 – 26 जून 2009 (पहला कार्यकाल)
- रमेश पोखरियाल निशंक: 27 जून 2009 – 10 सितंबर 2011
- भुवन चंद्र खंडूड़ी: 11 सितंबर 2011 – 13 मार्च 2012 (दूसरा कार्यकाल)
- विजय बहुगुणा: 13 मार्च 2012 – 31 जनवरी 2014
- हरीश रावत: 1 फरवरी 2014 – 18 मई 2017 (बीच में राष्ट्रपति शासन भी रहा)
- त्रिवेंद्र सिंह रावत: 18 मार्च 2017 – 10 मार्च 2021
- तीरथ सिंह रावत: 10 मार्च 2021 – 3 जुलाई 2021
- पुष्कर सिंह धामी: 4 जुलाई 2021 – वर्तमान (4 साल पूरे)
पुष्कर सिंह धामी का यह कार्यकाल उत्तराखंड की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो उनकी राजनीतिक सूझबूझ और बीजेपी हाईकमान के अटूट समर्थन को दर्शाता है।
File Photo – DIPR
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