हरिद्वार मनसा देवी भगदड़: 6 श्रद्धालुओं की मौत,एंबुलेंस चालक इरफान ने कई लोगों की बचाई जान
फरिश्ता बने इरफान
हरिद्वार मनसा देवी भगदड़ :हरिद्वार, उत्तराखंड, सावन के पवित्र महीने में आज हरिद्वार स्थित श्री मनसा देवी मंदिर में एक दुखद घटना घटित हुई। रविवार सुबह मंदिर परिसर में मची भगदड़ में छह श्रद्धालुओं की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। इस घटना से पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई है।

हरिद्वार मनसा देवी भगदड़ के कारण
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह हादसा सुबह करीब 11:39 बजे से 11:44 बजे के बीच तब हुआ जब मंदिर की सीढ़ी मार्ग पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा थी। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिजली का करंट फैलने की अफवाह के कारण अचानक भगदड़ मच गई, जिससे लोग अनियंत्रित होकर एक-दूसरे पर गिर पड़े। घायलों का उपचार ऋषिकेश एम्स और हरिद्वार के स्थानीय अस्पतालों में जारी है। इस हृदय विदारक घटना के बाद से ही एक नाम सबकी जुबान पर है – एंबुलेंस चालक इरफान, जिन्होंने आपदा की इस घड़ी में ‘देवदूत’ बनकर कई जिंदगियां बचाईं।
घायलों के लिए फरिश्ता बने इरफान: जैसे ही मनसा देवी मंदिर में भगदड़ की खबर फैली, मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। ऐसे विकट समय में, एंबुलेंस चालक इरफान ने अदम्य साहस और मानवीयता का परिचय दिया। बिना किसी हड़बड़ी और व्यक्तिगत जोखिम की परवाह किए, इरफान सबसे पहले घायलों को घटनास्थल से निकालकर अस्पताल पहुंचाने के काम में जुट गए।
उनकी तत्परता और निस्वार्थ सेवा ने कई गंभीर रूप से घायल लोगों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में मदद की, जिससे उनकी जान बच सकी। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय प्रशासन ने भी इरफान के इस असाधारण कार्य की सराहना की है। उनकी इस बहादुरी और संवेदनशीलता ने आपदा में मानवीय मूल्यों को ऊपर उठाया है।
हरिद्वार मनसा देवी भगदड़ के बाद मंदिर मार्ग पर चीख-पुकार मच गई। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जिनमें छोटे बच्चे भी शामिल हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हृदय विदारक घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

सावन के महीने में हरिद्वार, विशेषकर शिवालयों और प्रमुख मंदिरों में भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। मनसा देवी मंदिर हरिद्वार के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां दर्शन के लिए प्रतिदिन हजारों भक्त आते हैं। आज का दिन सामान्य रूप से शुरू हुआ था, लेकिन इस अप्रत्याशित घटना ने सावन की पवित्रता को शोक में बदल दिया।



