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Aasha Bhosle :दुनिया गानों की दीवानी- घटिया पत्रकारिता ताने देती रही

निराशाओं के बावजूद अपने नाम को आख़िरी दम तक जिया

आवाज़ सुरीली – जिंदगी बेसुरी रही

Aasha Bhosle:उस दौर की गायकी में एकदम अलग और अद्भुत प्रयोग के लिए आशा भोंसले एक ऐसा नाम था जिन पर हिंदुस्तानी क्लासिकल गीतों के साथ ही कई वेस्टर्न प्रयोग किए गए और वो गाने जब बजे तो लोगों के पैर नहीं दिल धड़क उठे। यकीन नहीं आता हो तो उनके गाने उठाकर खुद सुन लीजिए… mbi Manish Chandra

Aasha Bhosle दुनिया गानों की दीवानी- घटिया पत्रकारिता ताने देती रही

ये दोगला मीडिया है आज तमाम टीवी चैनल प्रिंट मीडिया डिजिटल मीडिया आशा ताई के निधन पर टेसुए बहा रहा है उन्हें महान बता रहा है मगर पूरी जिंदगी आशा भोंसले को गलीच पत्रकारों ने नीचा दिखाने का एक भी मौका जाने नहीं दिया आशा भोसले की जिंदगी में जब भी तूफान आया उन पर तानों की बौछार करके उन्हें बे साख्ता रुलाया…

आशा भोसले की निजी जिंदगी से लेकर प्रोफेशनल जीवन पर जितने तंज कसे गए शायद शायद उतना बुरा मीडिया ने फिल्मी दुनिया की किसी शख्सियत को नहीं कहा लानत है कलम के उन चपरासियों को जिन्होंने सरस्वती को शर्मिंदा किया उन लिखने वालों मेंसे कई तो अब
जिंदा भी नहीं होंगे …

आगे भी जाने ना तू पीछे भी जाने ना तू जो भी है बस यही एक पल है…

Aasha Bhosle सीन नं 1 पति ने निकाल दिया था घर से

उमस भरी गर्मी और हल्की बरसात की इक रात 5 साल का लड़का 3 साल की लड़की का हाथ पकड़े हुए सड़क किनारे लैंप पोस्ट के नीचे गर्भवती आशा ताई भूख प्यास की तड़प से बेहाल , मारपीट का दर्द अलग से पति ने निकाल दिया था घर से….

दुनिया जिनके गानों को गुनगुना रही थी वही शख्सियत आज ज़ार ज़ार रो रही थी शराबी शक्की पति जो आशा भोसले के पैसों पर अपनी जिंदगी बसर कर रहा था इसके बावजूद भी उसने कभी भी आशा को खुशी और सुकून का एक पल भी जीने नहीं दिया
आशा भोसले पूरी जिंदगी दुनिया को गीत सुनाती रही पर दर्द की कीमत पर अपनी जिंदगी जीने को मजबूर रहीं इतनी यातनाओं में लोग टूटकर बिखर जाते हैं आत्महत्या को गले लगा लेते हैं लेकिन न जाने वो कौन सी चाहत थी जो उनको हौसला देकर चलाती रहती।
आशा भोंसले को उनके पिता के परिवार में केवल 9 साल तक ही स्नेह और प्यार की छांव मिली … पिता दीनानाथ मंगेशकर के गुजर जाने के बाद बड़ी बहन लता मंगेशकर की मशहूरियत के साए तले उन्हें उस वक्त मायूसी और कमतरी का एहसास दिलाया जाता रहा लिहाजा जिंदगी बसर करने के लिए उन्हें काम की जद्दोजहद में इधर-उधर भटकना पड़ा लता की शख्सियत के आगे उन्हें हर जगह से रिजेक्शन ही झेलना पड़ा स्टूडियो के चक्कर काटती मिलो पैदल चलती बसों में धक्के खाती आशा भोसले बस किसी तरह रोजी-रोटी के लिए आजमाइश करती चली जा रही थीं.. बड़ी कोशिशें के बाद उन्हें वही गाने मिलते जिनको लता जी गाने से मना कर देती यानी कि वो सेकंड ग्रेड के गाने जिनको दोयम दर्जे का माना जाता।

पिता के बाद परिवार में सकून और चैन की गुंजाइश बिल्कुल नहीं थी ऐसे में परेशान आशा को लता मंगेशकर के सेक्रेटरी गणपत राव का छलावा भरा सहारा मिला गणपत राव ने उन्हें प्यार का स्वांग रचा और उनसे शादी करने की पेशकश रखी गणपत के मन में उनकी गायकी के बदले मिलने वाले रुपयों पर नज़र थी…गणपत आशा से दोगुनी उम्र के थे लता मंगेशकर बेहद नाराज हुयीं जमकर विरोध और लड़ाई झगड़े के बावजूद आशा और गणपत ने शादी कर ली।
फिर वही हुआ गणपत ने जितनी मारपीट दुख दर्द आशा को देना था वो वैसा ही करता रहा आशा जी के पैसे उड़ता रहा और उन पर तोहमतें लगता रहता और लानतें लगाकर पीटता रहा आशा भोंसले सब कुछ सहती रही और इसी बीच उनके तीन बच्चे राव से हुए और एक दिन फिर रात में गणपत ने खाली हाथ घर से निकाल दिया ये वही रात थी जब आशा गर्भवती थी और दोनों बच्चों को लेकर सड़क पर आ चुकी थी कहीं जाने का ठिकाना नहीं था इसलिए वो मन मार कर लता के पास रहने चली गई लेकिन यहां पर जिंदगी वैसी ही थी जो शादी से पहले थी बस किसी तरह मुश्किल से मिलने वाले काम से वो अपने बच्चे पालती रहीं

सीन नं 2- 14 साल पुराना रिश्ता खत्म चुका था

रिकॉर्डिंग स्टूडियो का बंद दरवाजा़ 2 घंटे बाद खुला आशा और ओपी नैयर का 14 साल पुराना रिश्ता खत्म चुका था एक बार फिर प्यार की डोर टूट चुकी थी..

दरअसल अपनी पहली शादी होने के बावजूद संगीतकार ओपी नैयर ने आशा भोंसले के टैलेंट को पहचान कर अपने करियर के ग्राफ को और भी ऊपर ले जाने के लिए उनका इस्तेमाल बखूबी किया । ओपी नय्यर शादीशुदा थे बावजूद इसके ओपी नय्यर और आशा भोसले 14 साल तक एक दूसरे के साथ रहे मगर इस बीच मीडिया ने आशा भोंसले पर जमकर लिखना शुरू कर दिया था घर तोड़ने वाली औरत पैसे और शोहरत की चाहत में परिवार तोड़ने वाली औरत ऐसे जुमले से अखबारों और पत्र पत्रिकाओं के पेज रंगे रहते आशा इन तानों के बीच में सुबकती रहीं किसी तरह जीती रहीं..

कुछ सालों बाद संगीतकार आर डी बर्मन जो की आशा भोसले से 6 साल छोटे थे उन्होंने फिल्मी संगीत में आशा भोंसले को लेकर कई वेस्टर्न प्रयोग किये जो कि काफी सफल रहे और फिर आशा और आरडी बर्मन ने शादी कर ली इस शादी को भी मीडिया वालों ने आशा भोंसले को आर डी बर्मन की उस वक्त की बुलंदी रसूख और शोहरत की फिराक वाली लालची औरत बताकर गॉसिप शुरू कर दी थी… धीरे-धीरे नए संगीतकारों के आने के बाद आरडी बर्मन को कम मिलना लगभग बंद हो गया अब फिल्मी दुनिया के लोगों ने आर डी बर्मन का फोन उठाना भी बंद कर दिया था .. इन सब को लेकर पंचम काफी उदास और परेशान रहने लगे शराब को उन्होंने अपने गले लगा लिया और शराब की इसी आदत के चलते उनकी तबीयत खराब रहने लगी इधर आशा भोंसले के तीनों बच्चे हेमंत ,वर्षा और आनंद उनके साथ में रहते थे जिनकी पढ़ाई लिखाई और घर का माहौल काफी खराब होता जा रहा था जिस कारण आशा भोंसले अलग फ्लैट लेकर रहने लगी लेकिन वो हर रोज़ राहुल देव बर्मन को देखने जाती उनका खाना बनातीं दवाइयां और इलाज कराती मीडिया ने उन्हें यहां पर भी नहीं बखशा.. पत्रकारों ने कई लेख लिखें आशा भोंसले को आरडी बर्मन की संपत्ति की लालची और धोखेबाज औरत के रूप में बताया गया। जबकि हकीकत ये रही कि जब राहुल देव बर्मन का इंतकाल हुआ तो उनके लॉकर में केवल ₹10 ही पाए गए वो सब कुछ अपनी शराब में लुटा चुके थे आशा भोंसले फिर एक बार इतने बड़े घर में अपने बच्चों के साथ अकेले रह गई ..

सीन नंबर 4 – खून से लथपथ अपनी बेटी की लाश को देख रही थी

आशा भोंसले एक म्यूज़िक कॉन्सर्ट में देश से बाहर गई हुई थी अचानक एक फोन कॉल आता है उन्हें वापस मुंबई लौटना पड़ता है।

आशा भोसले की बेटी वर्षा भोंसले की शादी शुदा जिंदगी कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रही थी उनकी जिंदगी में भी उथल-पुथल कुछ कम नहीं थी एक दिन उन्होंने एक ऐसा फैसला कर दिया जिसने आशा को फिर से तोड़ कर रख दिया वर्षा ने गोली मार कर आत्महत्या कर ली थी । आशा खून से लथपथ अपनी बेटी की लाश को देख रही थी वो मौन हो गई थी… इस पर भी मीडिया ने उन्हें नहीं छोड़ा तमाम सवाल और जवाब उनके सिर ही मढ़ दिए गए… इसके कुछ सालों बाद उनके बड़े बेटे हेमंत भी कैंसर से चल बसे…

सीन नंबर 5- दीदी लता के सिरहाने बैठी रहती

अब आशा के पास कोई भी नहीं बचा था सिवाय लता के बुढ़ापे में दोनों बहने एक साथ रहने लगी लता बेहद बीमार थी अक्सर आशा उनके सिरहाने बैठी रहती और उनका ख्याल रखतीं लेकिन एक दिन फिर उनकी प्यारी दीदी लता मंगेशकर भी उनको छोड़कर चली गई ..

ऊपर से देखने पर जिंदगी कितनी सुरीली लगती है लेकिन इन सुरों में मिठास थी लेकिन ग़म का साज़ हमेशा बजता रहा.. लोग पहनावे से और मुस्कुराहट से ये कभी नहीं जान पाए कि इस मीडिया ने कितना सताया है उनको जो आज उनके गुज़र जाने पर .. उनकी गायकी के गीत गा रहा है…

ख़बरों की फिराक में हम कितनों की ज़िंदगी खराब करते हैं

आशा भोसले जी आपकी जिंदगी को सलाम आपकी जीवटता को सलाम..जिंदगी में तमाम निराशाओं के बावजूद अपने नाम को आख़िरी दम तक जिया आपको मीडिया बॉक्स इंडिया का सलाम

जो भी है बस यही एक पल है

वो जो खनक थी
खामोश हो गई
आवाज़ जितनी सुरीली थी
जिंदगी उतनी बेसुरी बजती रही
हम तुम्हें गुनगुनाते रहे
तुम्हारे गीत गाते रहे

उस दौर में भी तुमने कहा था छोड़ दों आंचल ज़माना क्या कहेगा आगे भी जाने ना तू पीछे भी जाने ना तू..

आखिरी बार उन्होंने मीडिया के सामने किशोर कुमार की याद में एक गीत गुनगुनाया था जिंदगी के सफर में गुजर जाते हैं जो मकाॅ वो फिर नहीं आते..

आशा ताई को हमारी श्रद्धांजलि …अब तो गीतों में ही मिलोगी

Photo – google

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