वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026: उत्तराखंड के सीमांत गांवों में पहुंचे देशभर के माय भारत युवा स्वयंसेवक

देहरादून,युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के युवा मामलों के विभाग ने ‘मेरा युवा भारत’ (माय भारत) के माध्यम से विकसित जीवंत ग्राम कार्यक्रम (वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम) 2026 के पहले चरण की शुरुआत कर दी है। इसके तहत देशभर से आए माय भारत युवा स्वयंसेवक उत्तराखंड के चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जैसे सीमांत जिलों की समृद्ध विरासत, परंपराओं और सामुदायिक जीवन से रूबरू हो रहे हैं। यह एक अग्रणी युवा नेतृत्व वाली पहल है जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर जनभागीदारी को सुढ़ृढ करना, राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना और भारत के सीमावर्ती गांवों में सतत विकास को प्रोत्साहित करना है।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत चमोली जनपद के माणा, बामनी और गजकोटी में मॉडल ग्राम सभा का आयोजन किया गया। इसमें देशभर से पहुंचे युवाओं ने सीमांत गांवों की साझी सांस्कृतिक विरासत और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की सुंदर झलक देखी। स्वयंसेवक स्थानीय लोगों के साथ मिलकर घरेलू सर्वेक्षण कर रहे हैं, ग्राम सभा की गतिविधियों में भाग ले रहे हैं और स्वच्छता अभियानों में योगदान दे रहे हैं।
इसी कड़ी में पिथौरागढ़ जिले के सीमावर्ती गांव नाबी पहुंचने पर पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, पंजाब और कर्नाटक से आए प्रतिभागियों का पारंपरिक अंदाज में गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस दौरान वहां एक विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें नाभी गांव की ग्राम प्रधान कुमारी छभिता नबियाल, जनजातीय सलाहकार परिषद के सदस्य अशोक सिंह नबियाल, सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता धीरज सिंह नबियाल और व्यास ऋषि मेला समिति के अध्यक्ष मदन सिंह नबियाल उपस्थित रहे। इस संवाद में भारत के अग्रणी सीमावर्ती गांवों में से एक नाबी के ऐतिहासिक महत्व, सांस्कृतिक विरासत और रणनीतिक महत्व पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिससे युवाओं को सीमावर्ती क्षेत्रों की चुनौतियों और विकास के अवसरों को गहराई से समझने का मौका मिला।
वहीं उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री धाम के निकट भैरवघाटी में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और माय युवा भारत के समन्वय से युवा स्वयंसेवकों ने एक व्यापक सफाई अभियान चलाया। स्वच्छता के इस संदेश के साथ ही युवाओं ने भैरवघाटी के स्वच्छ और शांत वातावरण में योग सत्र में भी भाग लिया।
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के इस विशेष आयोजन में भाग लेने के लिए देशभर से कुल 500 माय भारत स्वयंसेवकों का चयन किया गया है। इन युवाओं का चयन एक राष्ट्रव्यापी ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के माध्यम से किया गया, जिसमें 3 लाख से अधिक युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया था। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले इन स्वयंसेवकों को लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के चिन्हित सीमावर्ती गांवों में दो चरणों में तैनात किया जा रहा है। प्रथम चरण में 250 स्वयंसेवक 43 गांवों में गहन गतिविधियों में भाग ले रहे हैं, जबकि शेष 250 स्वयंसेवक इस महीने के अंत में 50 गांवों में द्वितीय चरण की गतिविधियों में शामिल होंगे।
यह सात दिवसीय गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम सीमा जागरूकता, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, सामुदायिक जीवन, शासन, सामाजिक-आर्थिक मूल्यांकन और राष्ट्रीय एकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों के इर्द-गिर्द तैयार किया गया है। इस कार्यक्रम का एक प्रमुख हिस्सा ‘नेशन फर्स्ट चैलेंज’ का प्रचार-प्रसार करना भी है, जो जिम्मेदार नागरिकता और टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देने वाला एक राष्ट्रव्यापी अभियान है। इस अनूठी पहल से युवाओं को देश के अंतिम छोर पर बसे गांवों की सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं को करीब से जानने का अवसर मिल रहा है।




