जमीनी कार्यकर्ता देवेंद्र बिष्ट बने भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष

देवेन्द्र बिष्ट का भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर मनोनीत होना केवल एक राजनीतिक नियुक्ति नहीं है, बल्कि यह एक जमीनी कार्यकर्ता के वर्षों के कड़े संघर्ष और अटूट निष्ठा का प्रतिफल है। पार्टी द्वारा नई जिम्मेदारी मिलने पर देवेंद्र का पहला वक्तव्य यह है कि उनकी जिम्मेदारी अब पहले से ज्यादा बढ़ गई है मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उनके कार्यों को प्रदेश के घर घर तक ले जाना है और 2027 में पुनः धाकड़ धामी की सकारात्मक सोच वाली युवा सरकार बनाना है. एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले देवेन्द्र ने बिना किसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के राजनीति के शीर्ष पायदानों की ओर कदम बढ़ाए हैं।
देवेन्द्र बिष्ट -छात्र राजनीति से प्रदेश नेतृत्व तक का सफर
देवेन्द्र बिष्ट की पहचान हमेशा से एक ‘जुझारू’ नेता के रूप में रही है। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी। युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता का मुख्य कारण उनका सुलभ होना और उनके मुद्दों के लिए किसी भी हद तक जाना रहा है। छात्र हितों की रक्षा के लिए उन्होंने कई बार कठोर आंदोलनों का नेतृत्व किया, जिसमें भूख हड़ताल से लेकर विरोध स्वरूप मोबाइल टावर पर चढ़ने तक की घटनाएं शामिल हैं।
संघर्ष और समर्पण की मिसाल
देवेन्द्र का राजनीतिक जीवन व्यक्तिगत बलिदानों और साहसिक फैसलों से भरा रहा है।
देवेंद्र बिष्ट के संघर्ष की कुछ मुख्य कड़ियां इस प्रकार हैं:
अंतिम छोर तक लड़ाई: देवेंद्र ने अपनी सामाजिक चेतना को डी ए वी कॉलेज में छात्र राजनीति के माध्यम से जागृत किया, देवेंद्र एबीवीपी के जुझारू कार्यकर्ता रहे आपने शहर से लेकर देश और प्रदेश में एबीवीपी के कार्यकर्ता के रूप में कई दायित्वों को संभाला, जनहित के मुद्दों पर उन्होंने कई बार अपने प्राणों की बाजी लगाई, जिसमें विरोध स्वरूप जहर खाने जैसी आत्मघाती कोशिशें तक शामिल रहीं, जो उनके जुनून को दर्शाती हैं।
आपदा में सेवा: केदारनाथ आपदा के समय जब पूरा उत्तराखंड त्राहि-त्राहि कर रहा था, देवेन्द्र राहत सामग्री पहुंचाने के अभियान में सक्रिय थे। इसी दौरान वे एक गहरी खाई में गिर गए थे, जिससे वे गंभीर रूप से चोटिल हुए, लेकिन उन्होंने सेवा का मार्ग नहीं छोड़ा।
शून्य से शिखर: उनके परिवार का राजनीति से कोई दूर-दूर तक नाता नहीं था। उन्होंने ‘जीरो’ से शुरुआत की और जिला अध्यक्ष के रूप में सफल कार्यकाल पूरा करने के बाद अब प्रदेश संगठन में अपनी जगह बनाई है।
संगठन के प्रति अटूट विश्वास
अपनी नियुक्ति पर देवेन्द्र बिष्ट ने स्पष्ट किया कि उनकी यह प्रगति भारतीय जनता पार्टी की कार्यसंस्कृति का प्रमाण है। उनका मानना है कि भाजपा ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जहाँ एक सामान्य कार्यकर्ता की मेहनत को पहचाना जाता है और उसे नेतृत्व का अवसर दिया जाता है।
उनका कहना है कि एक छोटा कार्यकर्ता भी अपनी निष्ठा के दम पर ऊंचे पदों तक पहुँच सकता है। वर्तमान में उनका एकमात्र लक्ष्य पार्टी की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाना और संगठन के ‘झंडे को बुलंद’ करना है। प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में उन पर अब प्रदेश के युवाओं को पार्टी से जोड़ने की एक बड़ी जिम्मेदारी है।



