ट्रंप का ‘एग्जिट प्लान:ईरान-अमेरिका तनाव, ट्रंप का युद्ध समाप्ति का दावा और होर्मुज स्ट्रेट पर नई रणनीतिक शर्त
क्या ट्रंप का यह 'एग्जिट प्लान' वास्तव में शांति लाएगा या यह किसी बड़े विनाशकारी तूफान से पहले की शांति है

ट्रंप का ‘एग्जिट प्लान:मध्य पूर्व में जारी भीषण संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान देकर वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका अपने रणनीतिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के बेहद करीब है और अब वह इस युद्ध को धीरे-धीरे समाप्त करने की योजना बना रहा है। हालांकि, शांति के इस दावे के साथ ट्रंप ने एक ऐसी शर्त भी जोड़ दी है जिसने सहयोगी देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। ट्रंप का स्पष्ट कहना है कि दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति लाइन, ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) की सुरक्षा की मुख्य जिम्मेदारी अब उन देशों को उठानी होगी जो इसका उपयोग करते हैं।
ट्रंप का ‘एग्जिट प्लान’ और इजरायल के कड़े तेवर
युद्ध के 21वें दिन ‘ट्रुथ सोशल’ पर अपनी पोस्ट में ट्रंप ने एक चौंकाने वाला ‘एग्जिट प्लान’ पेश किया। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिकी सैन्य अभियान अब अपने अंतिम चरण में हैं। लेकिन दिलचस्प विरोधाभास तब देखने को मिला जब ट्रंप के इस शांति राग के कुछ ही घंटों बाद इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने ईरान पर और भी भीषण हमलों की चेतावनी दे दी। एक तरफ अमेरिका पीछे हटने की बात कर रहा है, तो दूसरी तरफ इजरायल और अमेरिका ने क्षेत्र में अतिरिक्त युद्धपोत तैनात कर अपनी सैन्य पकड़ को और मजबूत कर लिया है। यह स्थिति दर्शाती है कि सतह पर जो शांति की बातें हो रही हैं, गहराई में युद्ध की आग उतनी ही तीव्र है।
ईरान के परमाणु संयंत्र पर हमला और अहवाज में तबाही
जंग की तपिश अब ईरान के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले नतांज परमाणु संयंत्र तक जा पहुंची है। शनिवार को हुए एक बड़े हवाई हमले ने संयंत्र को भारी नुकसान पहुँचाया है, हालांकि ईरान ने किसी भी तरह के रेडिएशन रिसाव से इनकार किया है। इस हमले पर इजरायल की चुप्पी और रक्षा मंत्री के आक्रामक बयान सीधे तौर पर तेल अवीव की ओर इशारा कर रहे हैं। युद्ध का मानवीय चेहरा भी बेहद खौफनाक होता जा रहा है; दक्षिण-पश्चिमी ईरान के अहवाज में एक अस्पताल और मनोरंजन परिसर पर हुई बमबारी में एक मासूम की जान चली गई और स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप हो गई हैं।
होर्मुज स्ट्रेट: वैश्विक अर्थव्यवस्था का केंद्र और नई चुनौती
राष्ट्रपति ट्रंप का ‘एग्जिट प्लान नई रणनीति का सबसे अहम हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य है। वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी संकरे समुद्री मार्ग से गुजरता है। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों को अब अपनी समुद्री सुरक्षा में अग्रणी भूमिका निभानी होगी। हालांकि ट्रंप ने पहले ईरान को 20 गुना ताकत से जवाब देने की चेतावनी दी थी, लेकिन अब वे अमेरिका की सीधी भूमिका को कम कर सहयोगियों पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका का यह कदम ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरा हो सकता है।
जमीनी सैनिकों की तैनाती और घरेलू राजनीति का दबाव
भले ही ट्रंप सार्वजनिक रूप से ट्रंप का ‘एग्जिट प्लान युद्ध खत्म करने की बात कर रहे हों, लेकिन पेंटागन के गलियारों में जमीनी सैनिकों की तैनाती की खबरें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं। रिपब्लिकन पार्टी के भीतर से ही अब ट्रंप की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं। सीनेटर थॉम टिलिस जैसे नेताओं का मानना है कि 200 अरब डॉलर के भारी-भरकम बजट के बावजूद इस युद्ध का कोई स्पष्ट उद्देश्य और अंत नजर नहीं आ रहा है। अमेरिकी बाजार में तेल की बढ़ती कीमतों और शेयर बाजार की गिरावट ने भी सरकार पर दबाव बना दिया है, जिसके चलते ट्रंप ने ईरानी तेल जहाजों पर लगे कुछ प्रतिबंधों को हटाने का फैसला लिया है ताकि वैश्विक बाजार में ईंधन के दाम काबू में आ सकें।
ईरान का पलटवार और भविष्य की आशंकाएं
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए ईरानी जनता की एकजुटता का हवाला दिया है। ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि हमला हुआ तो दुनिया का कोई भी कोना सुरक्षित नहीं रहेगा। इस बीच सऊदी अरब द्वारा 20 ईरानी ड्रोनों को मार गिराना यह दर्शाता है कि संघर्ष की लपटें अब पड़ोसी देशों तक फैल चुकी हैं। चार हफ्तों की इस जंग में हजारों जानों का नुकसान हो चुका है और दुनिया अब टकटकी लगाए देख रही है कि क्या ट्रंप का यह ‘एग्जिट प्लान’ वास्तव में शांति लाएगा या यह किसी बड़े विनाशकारी तूफान से पहले की शांति है।



