Mumbai Beach Listening Serviceसमंदर किनारे बिक रहा है ‘सुकून’ ₹250 में अजनबियों का दर्द सुन रहा है यह शख्स, वीडियो वायरल!
यूजर्स इसे "नेक्स्ट लेवल स्टार्टअप" और "अर्बन लोनलीनेस का समाधान" कह रहे हैं
मुंबई:क्या आप जानते हैं कि सपनों के शहर मुंबई में अब ‘सुकून’ भी खरीदा जा सकता है? हाल ही में सोशल मीडिया पर Mumbai Beach Listening Service का एक वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है। जुहू बीच की लहरों के बीच बैठे एक शख्स ने अपनी इस अनोखी सेवा से न केवल इंटरनेट का ध्यान खींचा है, बल्कि पेटीएम (Paytm) के संस्थापक विजय शेखर शर्मा को भी हैरान कर दिया है। भागती-दौड़ती मुंबई (Mumbai) में हर कोई अपनी मंज़िल की तलाश में है, लेकिन इस आपाधापी में लोग अपने मन की बात कहना भूल गए हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर मुंबई के एक बीच (Beach) का वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसने मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) और मानवीय संवेदनाओं पर एक नई बहस छेड़ दी है। यहाँ एक शख्स समंदर की लहरों के बीच ‘मछलियाँ’ नहीं, बल्कि लोगों की ‘परेशानियाँ’ पकड़ रहा है।
Mumbai Beach Listening Service’कौन है यह शख्स और क्या है ‘?
इस सेवा को शुरू करने वाले शख्स की पहचान पृथ्वीराज बोहरा (Prithvi Raj Bohra) के रूप में हुई है। अंधेरी के रहने वाले पृथ्वीराज महज़ एक वेंडर नहीं हैं, बल्कि उनके पास साइकोलॉजी (Psychology) और फिलॉसफी (Philosophy) की समझ है। वे बीच पर एक हाथ से बने साइनबोर्ड के साथ बैठते हैं, जिस पर लिखा है: “किसी को अपना दुख सुनाना है तो मैं सुन सकता हूँ।”
रेत पर सजी Mumbai Beach Listening Service’ ‘सुनने’ वाली दुकान
बीच पर टहलते लोगों की नज़र तब ठिठक गई, जब उन्होंने रेत पर एक रंग-बिरंगा साइनबोर्ड देखा। यह कोई खाने-पीने का स्टॉल नहीं था, बल्कि एक “लिसनिंग सर्विस” (Listening Service) थी। यहाँ एक शख्स बैठा है जो केवल आपकी बातें सुनने के लिए तैयार है। आज के दौर में जहाँ हर कोई बोलना चाहता है, वहाँ कोई चुपचाप सुनने वाला मिल जाए, तो लोग उसकी ओर खिंचे चले आते हैं।
रेट कार्ड: छोटी फिक्र से लेकर भारी मन तक का इलाज
इस Mumbai Beach Listening Service की सबसे दिलचस्प बात इसका पारदर्शी रेट कार्ड है। पृथ्वीराज ने भावनाओं के हिसाब से अलग-अलग कीमतें तय की हैं इस अनोखे वेंडर ने अपनी सेवाओं के लिए एक दिलचस्प ‘मेनू कार्ड’ तैयार किया है, जो आपकी भावनात्मक स्थिति के अनुसार है:
- ₹250: छोटी-मोटी रोजमर्रा की समस्याओं के लिए।
- ₹500: गहरी और गंभीर चिंताओं के लिए।
- ₹1,000: उन पलों के लिए जब आपको रोने के लिए एक कंधे और बिना जज किए सुनने वाले साथी की ज़रूरत हो।
प्रोफेशनल डिग्री नहीं, ‘पैशन’ है असली ताकत
वीडियो में यह वेंडर बेहद सौम्य और मुस्कुराता हुआ नज़र आ रहा है। उसने बताया कि उसकी पृष्ठभूमि साइकोलॉजी (Psychology) और फिलॉसफी (Philosophy) में है। उसके लिए यह केवल एक बिज़नेस नहीं, बल्कि एक जुनून है। उसका लक्ष्य सरल है— “जब कोई मेरे पास आए तो वह बोझिल हो, लेकिन जब यहाँ से जाए तो उसका मन समंदर की लहरों की तरह हल्का और शांत हो।”

क्यों वायरल हो रही है यह ‘बीच-साइड थेरेपी’?
मुंबई जैसे भागदौड़ भरे शहर में मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) अक्सर पीछे छूट जाता है। पारंपरिक थेरेपी महंगी होती है और उसके लिए अपॉइंटमेंट की ज़रूरत होती है। लेकिन यह Mumbai Beach Listening Service एक अनौपचारिक और सुकून भरे माहौल में लोगों को अपनी बात कहने का मौका देती है।
सोशल मीडिया पर यूजर्स इसे “नेक्स्ट लेवल स्टार्टअप” और “अर्बन लोनलीनेस का समाधान” कह रहे हैं। विजय शेखर शर्मा ने भी इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा कि आज के समय में “सुनना” भी एक बड़ी सर्विस बन गई है।
सोशल मीडिया पर क्यों हो रही है तारीफ?
इंटरनेट पर लोग इस पहल को “सस्ते और सुलभ थेरेपिस्ट” के रूप में देख रहे हैं।
- अनौपचारिक माहौल: क्लिनिक की चारदीवारी और सफेद कोट के बजाय, खुले आसमान और समंदर के किनारे बात करना लोगों को ज़्यादा सुरक्षित महसूस करा रहा है।
- नो जजमेंट ज़ोन: यूजर्स का कहना है कि एक अजनबी को अपनी बात बताना अक्सर अपनों को बताने से आसान होता है क्योंकि वहाँ ‘जज’ किए जाने का डर नहीं होता।
सीख: अपनी मानसिक सेहत को नज़रअंदाज़ न करें
यह कहानी हमें सिखाती है कि मानसिक सुकून पाने के लिए महंगे अस्पतालों से ज़्यादा ज़रूरी है— संवाद (Communication)। मुंबई के इस वेंडर ने साबित कर दिया कि एक छोटा सा आइडिया भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है और किसी डूबते हुए मन को सहारा दे सकता है। mbi@ Manish Chandra
PHOTO – social media
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