Main Slideन्यूज़ निबंध

Plea Bargaining: उत्तराखंड में घटेंगे अदालती मुकदमे सरकार ने दी प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश

यह प्रावधान केवल उन अपराधों के लिए है जिनमें अधिकतम सजा 7 वर्ष से कम है

Plea Bargaining:देहरादून, उत्तराखंड सरकार प्रदेश की न्यायिक प्रणाली को अधिक सुगम, त्वरित और प्रभावी बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 के अंतर्गत ‘प्ली बार्गेनिंग’ (Plea Bargaining) के प्रावधानों को अब धरातल पर उतारने की तैयारी है। इसका मुख्य उद्देश्य अदालतों में वर्षों से लंबित मुकदमों के बोझ को कम करना और दोषियों को सुधार का अवसर देना है।

Plea Bargaining क्या है शासन की तैयारी?

केंद्रीय गृह सचिव के पत्र का संज्ञान लेते हुए, उत्तराखंड शासन के संयुक्त सचिव गजेन्द्र सिंह कफलिया ने पुलिस महानिरीक्षक (अपराध एवं कानून व्यवस्था), कारागार प्रशासन, चिकित्सा शिक्षा, एनआईसी (NIC) और अभियोजन निदेशालय समेत संबंधित विभागों को इस संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।

सरकार की प्राथमिकता है कि:

  • जनहित में व्यापक प्रचार-प्रसार: आम जनता को इस कानून की जानकारी दी जाए ताकि वे इसका लाभ उठा सकें।
  • प्रक्रिया में तेजी: न्यायिक प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाया जाए।
  • अदालतों पर दबाव कम करना: छोटे अपराधों के निपटारे के लिए ‘प्ली बार्गेनिंग’ को एक प्रभावी टूल के रूप में इस्तेमाल करना।

Plea Bargaining के मुख्य नियम

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के तहत इस प्रक्रिया को और अधिक स्पष्ट किया गया है:

  1. 7 वर्ष की सीमा: यह प्रावधान केवल उन अपराधों के लिए है जिनमें अधिकतम सजा 7 वर्ष से कम है।
  2. 30 दिनों का समय: आरोपी को आरोप (Charges) तय होने के 30 दिनों के भीतर ही आवेदन करना होगा।
  3. स्वैच्छिक स्वीकारोक्ति: आरोपी अपनी मर्जी से अपराध स्वीकार कर कम सजा या रियायत की मांग कर सकता है।

“इस नवीन प्रावधान का उद्देश्य न्याय प्रणाली में गतिशीलता लाना है। इससे न केवल पेंडिंग केस कम होंगे, बल्कि पीड़ितों को भी जल्दी न्याय मिल सकेगा।” – गजेन्द्र सिंह कफलिया, संयुक्त सचिव

READ ALSO – Bhranisain:सैन्य भावना से ही मुख्य सेवक के रूप में सेवा करने का प्रयास- सीएम धामी

PHOTO – GEMINI AI

Related Articles

Back to top button