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Radhey Krishna :चिंता आपसे अब दूर भागेगी, सुन लो गीता ज्ञान

चिंता आपसे अब दूर: भगवत गीता के अनुसार श्री कृष्ण कहते हैं चिंता मनुष्य को लक्ष्य से भटका देता है जबकि शांति उसे समाधान की ओर ले जाती है जब मन व्याकुल होता है तब बुद्धि भ्रमित हो जाती है और जब बुद्धि भ्रमित होती है तब सही निर्णय लेना संभव हो जाता है जिस तरह एक झील का पानी जब शांत होता है तो उसमें सब कुछ स्पष्ट दिखाई देता है वैसे ही जब हमारा मन शांत होता है तो हम सही निर्णय ले पाते हैं लेकिन अगर वही अपनी हिल जाए उसमें लहरें उठने लगे तो कुछ ही किसी तरह जब हमारा मन चिंता और डर से भर जाता है तो हम समस्या को सही तरह से देख ही नहीं पा आते यह ठीक वैसा ही है जैसे ढूंढ ले कहां से बाहर देखने की कोशिश करना ना तो चीज स्पष्ट दिखेगा और ना ही दिशा का पता चलेगा महाभारत में जब अर्जुन युद्ध भूमि में खड़े होकर अपने सगे संबंधियों को सामने देखते हैं तो उनका मन मोह और चिंता से भर जाता है उन्हें लगने लगता है कि यह युद्ध केवल विनाश लेगा और उनके प्रिय जनों की मृत्यु का कारण बनेगा वह इतने चिंतित हो जाते हैं कि उनके हाथ पैर कांपने लगते हैं उनकी बुद्धि भ्रमित हो जाती है और वह अपने कर्तव्य से पीछे हटने लगते हैं तब श्री कृष्णा उन्हें समझाते हैं की चिंता करने से सत्य नहीं बदल जाता और ना ही इसे कोई समस्या हल होती है वह अर्जुन से कहते हैं पार्थ तुम मोह में मत फसो यह संसार परिवर्तनशील है जो आज है वह कल नहीं रहेगा तुम्हारा कर्तव्य युद्ध करना है ना कि फल की चिंता करना जब तुम चिंता छोड़ दोगे तभी तुम्हारा मन हल्का होगा और तुम अपने मार्ग को स्पष्ट रूप से देख पाओगे

चिंता आपसे अब दूर समस्या का हल

इससे हमें यही सीख मिलती है कि जब भी हम किसी समस्या में हैं तो हमारा पहला कदम चिंता करने की बजाय अपने मन को शांत करना होना चाहिए …..चिंता आपसे अब दूर.. अक्सर हम सोचते हैं की चिंता करने से हमें हाल मिलेगा लेकिन सच तो यह है की चिंता हमें और अधिक उलझा देता है अगर कोई छात्र परीक्षा से पहले जरूरत से ज्यादा चिंता करने लगे तो वह पढ़ाई के बजाय सिर्फ यह सोचता रहेगा कि अगर मैं फेल हो गया तो क्या होगा अगर मैं अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाया तो लोग क्या कहेंगे इस चिंता में उसका दिमाग इस हद तक उलझ जाता है कि वह पढ़ाई पर ध्यान ही नहीं दे पाता नतीजा यह होता है कि जिसका डर था वही सच हो जाता है यानी चिंता करने से न सिर्फ समस्या का हल नहीं निकलता बल्कि स्थिति और बिगड़ जाती है कई बार जीवन में हम ऐसी परिस्थितियों में आ जाते हैं जहां हमें लगता है कि कोई रास्ता ही नहीं है हम बार-बार किसी समस्या के बारे में सोचते हैं उसे हर को से देखने की कोशिश करते हैं लेकिन कोई समाधान नहीं निकलता कारण यही है कि हमारा मन शांत नहीं होता जब मन शांत हो तो सोने की शक्ति कमजोर हो जाती है अगर हम इसे समझ जाए तो हमें कभी भी बेवजह चिंता करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी इसलिए जब भी कोई समस्या सामने आए खुद से यह सवाल पूछे क्या मेरी चिंता इस समस्या का हल निकाल रही है या मुझे और उलझा रही है अगर चिंता हल नहीं निकाल रही तो इसका मतलब साफ है कि हमें अपने मन को शांत करके सही दिशा में सोचना चाहिए यही एकमात्र तरीका है जिससे हम किसी भी कठिन परिस्थिति का हल ढूंढ सकते हैं

PHOTO – Gemini generated

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