Rajive Krishna बने यूपी के नए डीजीपी : 11 वरिष्ठ अफसरों को सुपरसीड कर 1991 बैच के इस जांबाज IPS को मिली यूपी पुलिस की कमान
Rajive Krishna लखनऊ, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश को आखिरकार अपना नया पुलिस महानिदेशक (DGP) मिल गया है। राज्य सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए, वर्ष 1991 बैच के वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी राजीव कृष्णा को उत्तर प्रदेश का नया पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया है। यह घोषणा शुक्रवार, 30 मई, 2025 को देर शाम की गई, जिसके बाद से प्रदेश के पुलिस महकमे में एक नए युग की शुरुआत की उम्मीद जाग उठी है। राजीव कृष्णा ने निवर्तमान डीजीपी प्रशांत कुमार का स्थान लिया है, जिन्हें सेवा विस्तार नहीं मिल सका।
Rajive Krishna: कौन हैं राजीव कृष्ण ?अनुभव, योग्यता और ‘सिपाही भर्ती परीक्षा’ के ‘हीरो’
डीजीपी Rajive Krishna अपनी निष्ठा, कुशल कार्यप्रणाली और बेदाग छवि के लिए जाने जाते हैं। इस महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी से पहले, वे उप्र पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के अध्यक्ष के साथ-साथ डायरेक्टर विजिलेंस जैसे अहम पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। उन्होंने 11 वरिष्ठ आईपीएस अफसरों को सुपरसीड कर यह पद हासिल किया है, जो उनकी योग्यता और सरकार के भरोसे को दर्शाता है।
मूल रूप से गौतमबुद्धनगर के निवासी राजीव कृष्णा ने इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है। उन्हें उनके शानदार सेवाकाल में दो बार राष्ट्रपति का गैलेंट्री अवार्ड भी मिल चुका है। उनकी सेवानिवृत्ति में अभी चार वर्ष और एक माह का समय बाकी है, जिससे वह लंबे समय तक प्रदेश के डीजीपी बने रह सकते हैं, जो पुलिस बल के लिए स्थिरता और दीर्घकालिक योजनाओं के कार्यान्वयन में सहायक होगा।
सिपाही भर्ती परीक्षा: जब राजीव कृष्णा ने संभाली थी कमान
दरअसल, प्रदेश में सिपाही नागरिक पुलिस के 60,244 पदों पर सीधी भर्ती की लिखित परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद प्रदेश सरकार ने राजीव कृष्णा को भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी थी। उन्होंने इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में परीक्षा को सकुशल संपन्न कराया, जिसकी वजह से उनकी काबिलियत का लोहा मानते हुए राज्य सरकार ने उन्हें प्रदेश पुलिस का मुखिया बनाने का फैसला लिया है।
राजीव कृष्णा का अनुभव केवल मुख्यालय तक सीमित नहीं है; वे लखनऊ, मथुरा, इटावा, आगरा और नोएडा समेत कई जिलों के पुलिस कप्तान (SP) भी रह चुके हैं। इटावा में अपनी तैनाती के दौरान उन्होंने दस्युओं के गिरोह का सफाया करने में अहम भूमिका निभाई थी। इसके अलावा, वह लखनऊ के एडीजी जोन भी रहे हैं और केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर बार्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) में आईजी ऑपरेशन के पद पर भी सेवाएं दे चुके हैं। यूपी में एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) के गठन में भी उनकी अहम भूमिका थी। उनकी पत्नी मीनाक्षी सिंह वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी हैं और वर्तमान में लखनऊ स्थित आयकर विभाग के मुख्यालय में तैनात हैं।
किन वरिष्ठ आईपीएस अफसरों को किया सुपरसीड?
राजीव कृष्णा ने अपने से वरिष्ठ कई अधिकारियों को सुपरसीड कर यह पदभार संभाला है। इनमें वर्ष 1989 बैच के शफी अहसान रिजवी, आशीष गुप्ता, आदित्य मिश्रा; वर्ष 1990 बैच के संदीप सालुंके, दलजीत सिंह चौधरी, रेणुका मिश्रा, बिजय कुमार मौर्य, एमके बशाल, तिलोत्तमा वर्मा; और वर्ष 1991 बैच के आलोक शर्मा व पीयूष आनंद जैसे अधिकारी शामिल हैं।

निवर्तमान डीजीपी प्रशांत कुमार को नहीं मिला सेवा विस्तार
शनिवार को दिनभर निवर्तमान डीजीपी प्रशांत कुमार को सेवा विस्तार मिलने की अटकलें लगती रहीं। देर शाम तक प्रशांत कुमार द्वारा डीजीपी पद का कार्यभार नहीं छोड़ने पर इन अटकलों को और बल मिल रहा था। हालांकि, रात करीब आठ बजे राजीव कृष्णा को डीजीपी बनाने की आधिकारिक घोषणा कर दी गई। देर शाम प्रशांत कुमार, राजीव कृष्णा और प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट कर उन्हें पुलिस विभाग की कॉफी टेबिल बुक भी भेंट की।
प्राथमिकताएँ और यूपी पुलिस का भविष्य
यूपी के नए डीजीपी राजीव कृष्णा के सामने संगठित अपराधों पर लगाम कसना, साइबर अपराधों से निपटना, सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना, महिला सुरक्षा सुनिश्चित करना और पुलिस आधुनिकीकरण जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य होंगे। सरकार को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में यूपी पुलिस अपराध नियंत्रण में और अधिक प्रभावी भूमिका निभाएगी, जिससे उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगी। यह नियुक्ति राज्य सरकार की प्रदेश में बेहतर और सुदृढ़ कानून-व्यवस्था स्थापित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है
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