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Uttrakhand वन्यजीव संघर्ष:सियासत न करें सुझाव दे विपक्ष- भाजपा विधायक विनोद चमोली

Uttrakhand वन्यजीव संघर्ष: उत्तराखंड में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है। जहां कांग्रेस इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए उग्र आंदोलन की चेतावनी दे रही है, वहीं भाजपा विधायक विनोद चमोली ने विपक्ष को नसीहत दी है कि वे केवल आरोप लगाने के बजाय ठोस और व्यावहारिक सुझाव दें।

Uttrakhand वन्यजीव संघर्ष ,समाधान के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी: विनोद चमोली

धर्मपुर विधायक विनोद चमोली ने कहा कि वन्यजीवों का हमला एक गंभीर मानवीय मुद्दा है, जिस पर राजनीतिक अवसरवादिता ठीक नहीं है। उन्होंने इस मुद्दे पर कई महत्वपूर्ण बिंदु रखे:

  • बदलता व्यवहार: चमोली ने कहा कि जंगली जानवरों के मनोविज्ञान और व्यवहार में बदलाव आया है, जो गहन अध्ययन का विषय है।
  • सरकार की पहल: उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने मृतकों और घायलों के लिए मुआवजा राशि में वृद्धि की है और सुरक्षा के प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।
  • विपक्ष से सवाल: चमोली ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में उनकी भी दो बार सरकार रही है। यदि उनके पास कोई ठोस रणनीति है, तो वे उसे सरकार के साथ साझा करें।

“यह आज का मुद्दा नहीं है। यदि भविष्य में कोई और सरकार आएगी, तब भी वन्यजीव संघर्ष रातों-रात समाप्त नहीं होगा। इसलिए सभी दलों को मिलकर जान-माल की सुरक्षा के लिए काम करना चाहिए।” – विनोद चमोली, विधायक

उत्तराखंड में गहराता संकट

पिछले कुछ महीनों में उत्तराखंड के पर्वतीय और मैदानी इलाकों में तेंदुओं और बाघों के हमलों में बढ़ोत्तरी हुई है। इस जनहानि के कारण जनता में आक्रोश है, जिसे देखते हुए विपक्ष लगातार सरकार की घेराबंदी कर रहा है। भाजपा का मानना है कि केवल प्रदर्शन से हल नहीं निकलेगा, बल्कि वैज्ञानिक और सामूहिक दृष्टिकोण अपनाना होगा।

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