उत्तराखंड की सुरक्षा, पर्यावरण और पर्यटन चुनौतियाँ: राजभवन के ‘विमर्श’ कार्यक्रम में फोकस
विकसित उत्तराखंड के लिए जनभागीदारी और स्थानीय प्रजातियों का संरक्षण सबसे बड़ा आधार
देहरादून:राजभवन में आज उत्तराखंड के भविष्य से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विषयों – सुरक्षा, पर्यावरण चुनौतियाँ और पर्यटन – पर केंद्रित एक विशेष “विमर्श” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आए विशेषज्ञों और गणमान्य व्यक्तियों ने उत्तराखंड के विकास की दिशा में सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया।
प्रमुख उद्गार और दिशा-निर्देश
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता ने विकसित उत्तराखंड के निर्माण के लिए तीन मूलभूत स्तंभों पर ज़ोर दिया:
- उत्तराखंड की सुरक्षा में प्रहरी बनें:
- उन्होंने कहा कि हम सभी को उत्तराखंड की सुरक्षा में प्रहरी बनकर सेवा करनी होगी। यह न केवल सीमाओं की सुरक्षा है, बल्कि राज्य की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव को बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है।
- संतों की परंपरा से पर्यावरण संरक्षण:
- पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर, उन्होंने कहा कि हमें अपने संतों की परंपरा को अपनाना चाहिए, जो प्रकृति के साथ सामंजस्य और सम्मान सिखाती है। पर्यावरण संतुलन बनाए रखना राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- ‘अतिथि देवो भव:’ से पर्यटन को समृद्ध करें:
- पर्यटन को ‘अतिथि देवो भव:’ की भावना से समृद्ध करने का आह्वान किया गया, ताकि उत्तराखंड न केवल एक सुंदर गंतव्य, बल्कि एक स्वागत योग्य और सुरक्षित स्थान भी बने।
विकसित उत्तराखंड का आधार
वक्ता ने स्पष्ट किया कि विकसित भारत और समृद्ध उत्तराखण्ड की दिशा में दृढ़ नेतृत्व, युवा शक्ति और जनभागीदारी ही हमारा सबसे बड़ा आधार है।
उन्होंने जोर दिया कि उत्तराखंड का भविष्य मुख्य रूप से सुरक्षा जागरूकता, पर्यावरण संतुलन और पर्यटन के विविधीकरण पर निर्भर करता है।
स्थायी विकास के लिए रोडमैप
स्थायी विकास के लिए निम्नलिखित बिंदुओं को प्राथमिकता देने पर सहमति बनी:
- स्थानीय प्रजातियों का संरक्षण और जैव विविधता की सुरक्षा।
- मानव-वन्यजीव संघर्ष के समाधान के लिए प्रभावी नीतियाँ और सामुदायिक जागरूकता।
- नए पर्यटन स्थलों का विकास ताकि पर्यटन का विकेंद्रीकरण हो और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो।
- सभी प्रयासों में जनसहभागिता सुनिश्चित करना।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन सामूहिक प्रयासों से उत्तराखंड निश्चित ही इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में देश का अग्रणी राज्य बनेगा।



