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सीएम धामी की पहल: आपदा प्रभावित हर्षिल के किसानों की मदद को आगे आई सरकार, उचित दाम पर खरीदी सब्जियां

सीएम धामी की पहल: उत्तरकाशी ,उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के संवेदनशील निर्देश के बाद, उत्तरकाशी जनपद के आपदा प्रभावित धराली और हर्षिल के आसपास के क्षेत्रों में किसानों की मदद के लिए एक बड़ी पहल शुरू की गई है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सड़क बाधित होने के कारण अपनी फसलें बाजार तक न पहुंचा पाने वाले किसानों को आर्थिक नुकसान से उबारना और उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाना है।

सीएम धामी की पहल-आपदा के बाद सरकार का त्वरित कदम

हाल ही में धराली में आई आपदा के कारण क्षेत्र के मार्ग बुरी तरह से बाधित हो गए थे। इससे यहां के किसानों द्वारा उगाई गई ताजी सब्जियां और फल बाजार तक नहीं पहुंच पा रहे थे, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हो रहा था। मुख्यमंत्री श्री धामी ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए तुरंत प्रभावित किसानों की मदद के निर्देश दिए।

उद्यान विभाग ने शुरू की खरीददारी:

जिलाधिकारी श्री प्रशांत आर्य ने मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन करते हुए उद्यान विभाग को प्रभावित क्षेत्र के स्थानीय किसानों से उनके द्वारा उगाई गई सब्जियों और फलों को उचित मूल्य पर खरीदने के निर्देश दिए। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो किसानों को तत्काल राहत प्रदान करेगा।

राहत शिविरों में होगा सब्जियों का उपयोग:

उद्यान विभाग द्वारा खरीदी गई इन सब्जियों का उपयोग आपदा प्रभावित क्षेत्रों में चलाए जा रहे राहत शिविरों, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अन्य संबंधित एजेंसियों द्वारा संचालित किए जा रहे सामुदायिक किचन (सामूहिक रसोई) में किया जाएगा। इस तरह, एक तरफ किसानों की फसल का सही उपयोग होगा, तो दूसरी तरफ राहत कार्यों में लगे लोगों और प्रभावितों को ताज़ी सब्जियां उपलब्ध हो सकेंगी।

पहले चरण में 37,080 रुपये की खरीद:

इस पहल के तहत, उद्यान विभाग ने धराली गांव के 21 किसानों से कुल 37,080 रुपये की सब्जियां खरीदी हैं। इसमें 40 रुपये प्रति किलो की दर से 309 किलो पत्ता गोभी, 50 रुपये प्रति किलो की दर से 304 किलो फूल गोभी और 40 रुपये प्रति किलो की दर से 238 किलो कद्दू शामिल हैं। यह खरीददारी किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान करेगी और उन्हें हौसला देगी।

मुख्यमंत्री धामी की यह पहल दिखाती है कि सरकार आपदा के समय न केवल राहत और बचाव कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, बल्कि प्रभावित लोगों, विशेषकर किसानों की आजीविका को सुरक्षित रखने के लिए भी संवेदनशील और प्रतिबद्ध है। यह कदम उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मॉडल में एक मानवीय और आर्थिक आयाम जोड़ता है।

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