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Uttarakhand Disaster Management: मानसून से पहले आपदा प्रबंधन की तैयारियां तेज, दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन

देहरादून: उत्तराखंड में आगामी मानसून सीजन को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गया है। देवभूमि में मानसून के दौरान आने वाली प्राकृतिक चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं।

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद एक्शन में प्रशासन

हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उच्च स्तरीय बैठक कर अधिकारियों को सभी आवश्यक व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के कड़े निर्देश दिए थे। सीएम के निर्देशों का पालन करते हुए विभाग धरातल पर मुस्तैद नजर आ रहा है।

NIDM और USDMA की संयुक्त राष्ट्रीय कार्यशाला

इसी कड़ी में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (NIDM), गृह मंत्रालय, भारत सरकार तथा उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) के संयुक्त तत्वावधान में 11 और 12 जून को एक महत्वपूर्ण दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य मानसून पूर्व तैयारियों को मजबूत करना और आधुनिक तकनीकों का समन्वय करना था।

त्वरित कार्रवाई पर फोकस: “मानसून के दौरान आम जनता को किसी प्रकार की दिक्कत न हो, इसके लिए सभी तैयारियों की लगातार समीक्षा की जा रही है। संवेदनशील क्षेत्रों, राहत-बचाव संसाधनों और अंतर्विभागीय समन्वय (Inter-departmental coordination) पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।” — विनोद कुमार सुमन, सचिव, आपदा प्रबंधन

तैयारियों के मुख्य बिंदु:

  • संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी: भूस्खलन और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां पहले से ही टीमें तैनात की जा रही हैं।
  • संसाधनों की मैपिंग: राहत और बचाव कार्य में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और सैटेलाइट फोन आदि की रीयल-टाइम चेकिंग की जा रही है।
  • त्वरित प्रतिक्रिया बल (Quick Response): किसी भी आपातकालीन स्थिति में रिस्पॉन्स टाइम को कम से कम करने के लिए रोडमैप तैयार किया गया है।

उत्तराखंड सरकार का लक्ष्य है कि इस बार तकनीक और बेहतर समन्वय के दम पर मानसून के दौरान होने वाले नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।

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