Dehradun:दूरस्थ गांवों के दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सिविल सेवा की राह आसान


उत्तराखंड के पहाड़ी और दूरदराज के गांवों में बैठकर प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना देखने वाले दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए अब भौगोलिक दूरियां और संसाधनों का अभाव बाधा नहीं बन रहा है। आधुनिक तकनीक, विषय विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और निःशुल्क कोचिंग की मदद से उनके सपनों को नई उड़ान मिल रही है। राजधानी देहरादून में संचालित इस विशेष सिविल सेवा कोचिंग केंद्र के जरिए गढ़वाल और कुमाऊं के दूरस्थ इलाकों में रह रहे दिव्यांग अभ्यर्थी घर बैठे आईएएस और पीसीएस की तैयारी कर रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में समावेशिता और समान अवसरों को बढ़ावा देने वाली यह पहल राज्य में एक नया मील का पत्थर साबित हो रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के अनुरूप, समाज कल्याण विभाग और राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में यह निःशुल्क कोचिंग व्यवस्था चलाई जा रही है। इसके तहत राज्य के हर जिले से चुने गए दिव्यांग अभ्यर्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उच्च स्तरीय शिक्षण और मार्गदर्शन मिल रहा है। राजपुर रोड स्थित राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान में स्थापित इस हाईटेक केंद्र पर विषय विशेषज्ञ शिक्षक अभ्यर्थियों को सिविल सेवा परीक्षाओं के विभिन्न विषयों की बारीकियां समझा रहे हैं।
तकनीक ने मिटाई दूरियां, गांवों से जुड़ रही हैं ऑनलाइन कक्षाएं
इस अनूठी पहल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि विद्यार्थियों को कोचिंग का लाभ उठाने के लिए हर बार देहरादून आने की जरूरत नहीं पड़ती है। प्रतिदिन शाम चार से सात बजे तक चलने वाली ऑनलाइन कक्षाओं के जरिए दूर-दराज के क्षेत्रों में बैठे अभ्यर्थी भी सीधे शिक्षकों से जुड़कर पढ़ाई कर रहे हैं। गूगल मीट और साइन लैंग्वेज जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से शिक्षण को बेहद सुलभ बनाया गया है, ताकि हर छात्र अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार अध्ययन कर सके।
कोचिंग के दौरान सामान्य अध्ययन (जीएस), सीसैट, तार्किक क्षमता, गणित और अन्य जरूरी विषयों की गहन तैयारी कराई जा रही है। विषयवार ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता को विकसित करने, वैचारिक स्पष्टता लाने और उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के कड़े मानदंडों के अनुरूप ढालने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
जल्द शुरू होगी बैंकिंग और एसएससी की निःशुल्क कोचिंग
समाज कल्याण विभाग के सचिव डॉ. श्रीधर बाबू अद्दांकी ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री के निर्देशों पर समाज कल्याण विभाग और राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान के सहयोग से यह निःशुल्क कोचिंग शुरू की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य दिव्यांग अभ्यर्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहतरीन शैक्षणिक सुविधाएं और सही मार्गदर्शन देना है।
उन्होंने आगे बताया कि फिलहाल केंद्र में आईएएस और पीसीएस परीक्षाओं की तैयारी पर फोकस किया जा रहा है। आने वाले समय में विद्यार्थियों के लिए रोजगार और करियर के दायरे को और व्यापक बनाने के उद्देश्य से जल्द ही बैंकिंग और कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) की परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग भी शुरू की जाएगी।
19 लाख रुपये से तैयार हुआ हाईटेक साउंडप्रूफ कोचिंग रूम
दिव्यांग विद्यार्थियों को अत्याधुनिक डिजिटल शिक्षण सुविधाएं देने के लिए जिला प्रशासन देहरादून और समाज कल्याण विभाग ने मुख्यमंत्री घोषणा के तहत 19 लाख रुपये की लागत से एक हाईटेक साउंडप्रूफ कोचिंग रूम तैयार किया है। यह केंद्र आधुनिक तकनीकी उपकरणों से पूरी तरह लैस है, जिससे डिजिटल कक्षाओं के सुचारू संचालन और दूरदराज के छात्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्टडी मटेरियल पहुंचाने में आसानी हो रही है।
इस हाईटेक रूम में वीडियो मिक्सर, कॉर्डलेस माइक्रोफोन, 75 इंच की बड़ी टीवी स्क्रीन, तीन कंप्यूटर कंसोल, थिएटर लाइट और आधुनिक कैमरे जैसी तमाम सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन उपकरणों के जरिए शिक्षकों के लेक्चर और डिजिटल कक्षाओं का प्रसारण किया जा रहा है, जिससे गांव-देहात के विद्यार्थी भी बिना किसी रुकावट के शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
आत्मनिर्भर बनने का सशक्त मंच
देहरादून जिले से चयनित दिव्यांग छात्र मोहन दास का कहना है कि मुख्यमंत्री की इस पहल ने दिव्यांग युवाओं को आत्मनिर्भर बनने और अपने सपनों को जमीन पर उतारने का बेहतरीन अवसर दिया है। आधुनिक तकनीक के जरिए राज्य के दूरस्थ कोनों में बैठे छात्रों को एक मंच पर लाना इस व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत है, जिससे सभी को समान रूप से उच्च कोटि का शैक्षणिक मार्गदर्शन मिल रहा है।
प्रतिभा को सही अवसरों से जोड़ने की सार्थक पहल
यह निःशुल्क सिविल सेवा कोचिंग सिर्फ परीक्षा की तैयारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिव्यांग विद्यार्थियों के भीतर आत्मविश्वास जगाने, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और एक सुरक्षित भविष्य की ओर ले जाने का माध्यम है। अत्याधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ शिक्षकों के सहयोग और सुलभ शिक्षा व्यवस्था के जरिए उन युवाओं तक पहुंच बनाई जा रही है, जिनके लिए आर्थिक तंगी या दूरी के कारण बड़े शहरों में रहकर तैयारी करना असंभव होता था।
यह पहल इस बात को पुख्ता करती है कि प्रतिभा किसी भी शारीरिक सीमा या भौगोलिक दूरी की मोहताज नहीं होती है। यदि सही मार्गदर्शन, सुलभ संसाधन और समान अवसर मिल जाएं, तो दूर-दराज के गांवों में रहने वाले दिव्यांग युवा भी सिविल सेवा और अन्य बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता का नया इतिहास लिख सकते हैं।



